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जलवायु एवं नदी अपवाह तंत्र (Climate & Drainage System of CG)

CGPSC और व्यापम की परीक्षाओं के लिए छत्तीसगढ़ की जलवायु, ऋतुएँ, वर्षा वितरण और प्रमुख नदी अपवाह तंत्र (महानदी, गोदावरी, सोन) का संपूर्ण नोट्स संकलन।

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छत्तीसगढ़ में जलवायु

जलवायु अरबी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ ऋतुओं की दिशा में परिवर्तन होता है। प्रदेश में स्थित उच्चावच अर्थात् पर्वत, पठार जलवायु को प्रभावित करती है。

जलवायवीय विशेषताएँ

  • छत्तीसगढ़ की जलवायु मानसूनी है अर्थात् यहां की वर्षा मुख्यतः मानसून पर निर्भर होती है।
  • यहाँ पर उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु पाया जाता है। (मकर रेखा एवं कर्क रेखा की मध्य के जलवायु को उष्ण कटिबंधीय जलवायु कहा जाता है)।
  • छ.ग. में औसत वार्षिक वर्षा 1300 से 1325 मिमी. (औसत 1200 मिमी. / 129 सेमी.) होती है।
  • छत्तीसगढ़ की जलवायु गर्म (उष्ण) और आर्द्र होती है अर्थात् शुष्क उपार्द्र है। जिसका प्रमुख कारण कर्क रेखा से निकटता है।
  • किन्तु भू-आवेष्ठित होने के कारण महाद्वीपीय भी है अर्थात् उपार्द्र महाद्वीपीय जलवायु का छत्तीसगढ़ राज्य में फैलाव पाया जाता है।

छत्तीसगढ़ में ऋतुएँ एवं वर्षा वितरण

सम्पूर्ण भारत की ऋतुओं को 04 भागों में विभाजित किया जाता है किन्तु छत्तीसगढ़ में ऋतुओं को मुख्यतः 03 भागों में विभाजित किया गया है-

ग्रीष्म ऋतु

(16 फरवरी - 15 जून)

  • मई उत्तरार्द्ध-जून पूर्वार्द्ध में उष्ण व शुष्क हवाएं ('लू')।
  • सर्वाधिक गर्म स्थान: चांपा।

वर्षा ऋतु

(16 जून - 15 अक्टूबर)

  • मानसून प्रवेश: 10-15 जून।
  • बंगाल की खाड़ी (90%) व अरब की खाड़ी (10%) से मानसून।

शीत ऋतु

(16 अक्टूबर - 15 फरवरी)

  • शीतकालीन वर्षा: पश्चिमी गर्त से।
  • सर्वाधिक ठण्डा स्थान: अम्बिकापुर।

वर्षा का वितरण

तथ्यवर्षा सीमाक्षेत्र
अधिकतम वर्षा1500 मिमी. से अधिकदेवगढ़ पहाड़ी के उत्तरी क्षेत्र, जशपुर पाट, ऊपरी ईब नदी घाटी, चंवरढाल, उत्तर रायगढ बेसिन, दण्डकारण्य (अबूझमाड़) क्षेत्र
अधिक वर्षा1400-1500 मिमी.पश्चिम जशपुर क्षेत्र, हसदो नदी घाटी, उत्तरी दण्डकारण्य क्षेत्र
मध्य वर्षा1300-1400 मिमी.उत्तरी कोरिया, उत्तरी सरगुजा, पश्चिमी रायगढ़, दक्षिणी महासमुंद, गरियाबंद, दक्षिणी राजनांदगांव, धमतरी
न्यूनतम वर्षा1300 मि.मी. से कमउत्तर-पूर्वी बघेलखण्ड, मैकल श्रेणी (कवर्धा और पश्चिमी राजनांदगांव), मध्यवर्तीय महानदी बेसिन (इस भाग में शिवनाथ पार का मैदान, महानदी-शिवनाथ का दोआब क्षेत्र, इत्यादि)

महानदी अपवाह तंत्र

  • इसका विस्तार छ.ग. के 77.432 हजार वर्ग किमी. में है।
  • इस अपवाह तंत्र का विस्तार मध्य छ.ग. में है जिसका ढाल पूर्व की ओर है।
  • महानदी छ.ग. का सर्वाधिक क्षेत्र घेरता है।

महानदी का सामान्य परिचय

  • उद्गम: सिहावा पर्वत के फरसिया नामक स्थान से (धमतरी)।
  • विसर्जन: कटक (ओड़िशा) के निकट बंगाल की खाड़ी में।
  • कुल लम्बाई: 858 किमी. (छत्तीसगढ़ में प्रवाह 286 किमी.)। यह छ.ग. की सबसे लम्बी नदी है।
  • तट पर स्थित स्थल: राजिम (गरियाबंद), सिरपुर (महासमुंद), पलारी (बलौदाबाजार), शिवरीनारायण व चन्द्रपुर (जांजगीर-चांपा)।

नामकरण एवं संगम

  • प्राचीन नाम: चित्रोत्पला, नीलोत्पला (द्वापर युग), कनकनंदिनी (सतयुग)।
  • अन्य नाम: ऋषितुल्या, छ.ग. की गंगा, छ.ग. की जीवन रेखा।
  • राजिम संगम: महानदी + पैरी + सोंदूर।
  • शिवरीनारायण संगम: महानदी + शिवनाथ + जोंक।
  • चंद्रपुर संगम: महानदी + मांड + लात।
प्रमुख परियोजनाएं एवं बैराज

बांध: हीराकुंड बांध (ओडिशा में कटक के समीप) भारत का सबसे लंबा बांध है。

परियोजनाएं (धमतरी जिले में महानदी पर):

  1. रूद्री बैराज परियोजना (1912-15)
  2. दुधवा जलाशय (1965)
  3. गंगरेल बांध (रविशंकर जलाशय) (1979)

बैराज: 1. समोदा बैराज (रायपुर), 2. शिवरीनारायण बैराज, 3. साराडीह बैराज, 4. बसंतपुर बैराज, 5. मिरौनी बैराज, 6. कलमा बैराज (सभी जांजगीर-चांपा में)。

महानदी की सहायक नदियाँ

दक्षिण की ओर से सहायक नदियाँ

1. दूध नदी
  • उद्गम: मलाजकुंडम पहाड़ी (कांकेर)।
  • विशेष: इसमें मलाजकुंडम जलप्रपात स्थित है।
2. सिलयारी नदी
  • परियोजना: मॉडमसिल्ली जलाशय (1923) धमतरी जिले में।
3. सोंदूर नदी
  • उद्गम: नवरंगपुर (ओडिशा)।
  • परियोजना: सोंदूर परियोजना (1979-80, धमतरी)।
4. पैरी नदी
  • उद्गम: भातृगढ़ पहाड़ी (गरियाबंद)।
  • विसर्जन: राजिम के समीप महानदी में।
5. जोंक नदी & 6. तेल नदी
  • जोंक उद्गम: सोनबेरा पठार (ओडिशा)।
  • तेल उद्गम: देवभोग (गरियाबंद)।

उत्तर की ओर से सहायक नदियाँ

1. शिवनाथ नदी

  • उद्गम: गोड़री गांव, गढ़चिरौली (महाराष्ट्र)।
  • कुल लम्बाई: 290 किमी. (छत्तीसगढ़ में बहने वाली सबसे लम्बी नदी)।
  • तटीय स्थल: दुर्ग, नांदघाट, मदकूद्वीप, सोमनाथ।
  • विशेष: यह महानदी की सबसे बड़ी सहायक नदी है। ऐतिहासिक काल में 36 गढ़ों को दो भागों (18-18 गढ़ों) में विभाजित करती थी।
  • शिवनाथ की सहायक नदियाँ:
    • खरखरा नदी (खरखरा जलाशय - बालोद)।
    • तांदुला नदी (तांदुला जलाशय - बालोद, छ.ग. की प्रथम परियोजना 1913)।
    • खारून नदी (सोमनाथ के निकट शिवनाथ में विसर्जन, तट पर रायपुर व तरीघाट)।
    • मनियारी नदी (मदकूद्वीप के निकट विसर्जन, तट पर अमेरीकापा तालागांव)।
    • अर्पा नदी (खोड़ी खोंगसरा पहाड़ी से उद्गम, भैंसाझार परियोजना)।
2. हसदेव नदी
  • उद्गम: देवगढ़ पहाड़ी (कोरिया)।
  • लम्बाई: 176 किमी। तटीय नगर: कोरबा, चांपा, पीथमपुर।
  • परियोजना: हसदेव बांगो (मिनीमाता परियोजना 1967) - छ.ग. की प्रथम बहुउद्देशीय परियोजना, सबसे ऊँचा बांध (87 मी.)।
3. मांड नदी & 4. केलो नदी
  • मांड: मैनपाट (सरगुजा) से उद्गम। महानदी से संगम पर चंद्रहासिनी देवी मंदिर है।
  • केलो: लुड़ेग पहाड़ी (रायगढ़) से उद्गम। केलो/स्व. दिलीप सिंह जूदेव परियोजना।
5. ईब नदी
  • उद्गम: खुरजा पहाड़ी के रानीझूला (पंडरापाट, जशपुर)।
  • विशेष: इस नदी की रेत में सोने के कण पाए जाते हैं।

गोदावरी अपवाह तंत्र

गोदावरी प्रवाह बेसिन छत्तीसगढ़ राज्य के दक्षिणी भाग में स्थित है। गोदावरी नदी पर पोलावरम बांध है जो छत्तीसगढ़, तेलंगाना व आन्ध्रप्रदेश के बीच है。

1. इंद्रावती नदी

  • प्राचीन नाम: मंदाकिनी।
  • उद्गम: मुंगेर पर्वत, कालाहांडी जिला (ओडिशा)।
  • जलप्रपात: चित्रकोट जलप्रपात।
  • विशेष: पश्चिम की ओर बहती है। बस्तर संभाग की जीवन रेखा कहलाती है। गोदावरी बेसिन एवं बस्तर के पठार की सर्वप्रमुख नदी है।

इन्द्रावती की सहायक नदियाँ

  • कोटरी नदी: प्राचीन नाम परलकोट, उद्गम राजहरा की पहाड़ी। यह इन्द्रावती की सबसे बड़ी सहायक नदी है।
  • नारंगी नदी: कोंडागांव शहर इसके तट पर है।
  • शंखिनी नदी: उद्गम नंदीराज चोटी (बैलाडीला)। इसका जल रक्ताम (लाल) है।

अन्य प्रमुख नदियाँ

  • शबरी नदी: उद्गम नन्दपुर पर्वत (ओडिशा), लम्बाई 173 किमी। राज्य की एकमात्र नदी जिसमें कोंटा से कुनावरम् तक 36 किमी. जल परिवहन उपलब्ध है। यह छ.ग. की दक्षिणी सीमा रेखा बनाती है।
  • बाघ नदी: यह छ.ग. और महाराष्ट्र की सीमा बनाती है।

सोन/गंगा नदी अपवाह तंत्र

यह अपवाह तंत्र राज्य की तीसरी बड़ी नदी अपवाह तंत्र है जो 13.63 प्रतिशत तक जल धारण करती है तथा 18.78 हजार वर्ग किमी. में विस्तृत है。

सोन नदी अपवाह तंत्र की प्रमुख सहायक नदियां

1. बनास नदी
उद्गम: मांजटोली की पहाड़ी से, भरतपुर तहसील (कोरिया)।
2. गोपद नदी
उद्गम: सोनहत पठार (कोरिया से)।
3. नेयुर नदी
विशेष: यह मध्यप्रदेश एवं छ.ग. के मध्य सीमा रेखा बनाती है।
4. रिहन्द नदी
  • उद्गम: छुरी मतिरिंगा पहाड़ी, अंबिकापुर तहसील (सरगुजा)।
  • विशेष: सरगुजा की जीवन रेखा कहलाती है।
  • इसके तट पर महेशपुर पुरातात्विक स्थल स्थित है।
  • इस नदी पर उ.प्र. के मिर्जापुर में गोविंद वल्लभ पंत जलाशय (रिहन्द बांध) है।
5. कन्हार नदी
  • उद्गम: बखोना चोटी (बगीचा, जशपुर)।
  • विशेष: तट पर डीपाडीह (बलरामपुर) पुरातात्विक स्थल स्थित है।
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🎯 अभी इसी टॉपिक के 5 प्रश्न हल करें (Instant Topic Quiz)

विषय: छत्तीसगढ़ की नदियाँ, अपवाह तंत्र, जलप्रपात एवं सिंचाई परियोजनाएं — ऊपर पढ़े गए नोट्स की तुरंत जाँच करें!

आपका लाइव स्कोर
0 / 5
अभ्यास प्रश्न #1 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 1: छत्तीसगढ़ की जीवनरेखा "महानदी" का उद्गम कहाँ से होता है और छत्तीसगढ़ में इसकी लंबाई कितनी है?

अभ्यास प्रश्न #2 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 2: छत्तीसगढ़ में बहने वाली सबसे लंबी नदी (290 किमी) कौन-सी है?

अभ्यास प्रश्न #3 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 3: भारत का सबसे चौड़ा जलप्रपात "चित्रकोट जलप्रपात" (भारत का नियाग्रा) किस नदी पर स्थित है?

अभ्यास प्रश्न #4 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 4: छत्तीसगढ़ का सबसे ऊँचा बांध (87 मीटर) "मिनीमाता बांगो बांध" किस नदी पर और किस जिले में स्थित है?

अभ्यास प्रश्न #5 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 5: छत्तीसगढ़ के प्रमुख "प्रयाग (नदी संगम)" और उनके नदियों का कौन-सा युग्म सही है?

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