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छत्तीसगढ़ का भूगोल (Geography & Soils of CG)

CGPSC और व्यापम की परीक्षाओं के लिए भौगोलिक सीमारेखा, भू-गर्भिक संरचना, पर्वत, पठार, पाट-प्रदेश एवं मिट्टियों के सबसे महत्वपूर्ण तथ्यों का रंगीन एवं स्मार्ट नोट्स संकलन।

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छत्तीसगढ़ राज्य की भौगोलिक सीमारेखा

छ.ग. का क्षेत्रफल
1,35,191 वर्ग किमी
भारत के क्षेत्रफल का
4.11%
भारत में स्थान
9 वां
  • छ.ग. राज्य भारत के प्रायद्वीप पठार का हिस्सा है।
  • छ.ग. राज्य की आकृति समुद्री घोड़ा (Sea Horse/Hepocampus) के समान है।
  • छ.ग. पूर्णतः एक भू-आवेष्ठित राज्य है, जिसकी सीमा न तो किसी समुद्र या अंतर्राष्ट्रीय देश को स्पर्श करते हैं।
  • छ.ग. की सबसे अधिक अंतर्राज्यीय सीमा वाला जिला बलरामपुर है। छ.ग. की सबसे कम अंतर्राज्यीय सीमा वाला जिला धमतरी है।
  • बलरामपुर एवं सुकमा जिला जिसकी सीमा 3 राज्यों को स्पर्श करती है।
  • छ.ग. राज्य देश की 7 राज्यों की सीमाओं से जुड़ी है। छ.ग. की सबसे लम्बी सीमा को छूने वाला राज्य ओडिशा है तथा राज्य की सबसे कम सीमा छूने वाला राज्य आंध्रप्रदेश है।
  • छ.ग. से लगा हुआ सबसे बड़ा राज्य (क्षेत्रफल में) मध्यप्रदेश है एवं सबसे छोटा राज्य झारखण्ड है।

पड़ोसी राज्य एवं स्पर्श करने वाले जिले

दिशा राज्य स्पर्श जिलों की संख्या स्पर्श जिला
पूर्वओडिशा08 जिलाजशपुर, रायगढ़, महासमुंद, गरियाबंद, धमतरी, कोंडागांव, बस्तर, सुकमा
पश्चिम उत्तरमध्यप्रदेश07 जिलाबलरामपुर, सूरजपुर, कोरिया, गौ.पे.म., मुंगेली, कवर्धा, राजनांदगांव
पश्चिममहाराष्ट्र04 जिलाराजनांदगांव, कांकेर, नारायणपुर, बीजापुर
दक्षिण-पश्चिमतेलंगाना02 जिलाबीजापुर, सुकमा
उत्तर-पूर्वझारखंड02 जिलाबलरामपुर, जशपुर
उत्तरउत्तरप्रदेश01 जिलाबलरामपुर
दक्षिणआंध्रप्रदेश01 जिलासुकमा

छ.ग. का भू-गर्भिक संरचना

छत्तीसगढ़ की भू-गर्भिक संरचना में आर्कियन, धारवाड़, कड़प्पा, गोंडवाना, दक्कन ट्रेप आदि शैल समूहों का विस्तार है。

  • आर्कियन शैल समूह (50%)
    यह सबसे प्राचीन तथा छ.ग. के धरातलीय बनावट में प्रमुख है। छ.ग. के अधिकांश भाग (सम्पूर्ण छत्तीसगढ़) में आर्कियन शैल समूह विद्यामान है।
  • धारवाड़ शैल समूह
    निर्माण आर्कियन चट्टानों के जलीय अपरदन से (अवसादी प्रकार) हुआ है। इसका विस्तार पूर्वी बघेलखण्ड, छत्तीसगढ़ का मैदान, एवं दण्डकारण्य (बस्तर संभाग) क्षेत्रों में है।
  • कड़प्पा शैल समूह (25-30%)
    यह अवसादी क्रम का है। इसका विस्तार छत्तीसगढ़ के मैदानी भागों में / महानदी बेसिन / छत्तीसगढ़ बेसिन में है।
  • गोण्डवाना शैल समूह (17%)
    नदियों के अवसादों के रूप में युगों से जमे वनस्पतियों एवं जीवों के अवशेषों से निर्मित है। इसका विस्तार सरगुजा बेसिन / बघेलखण्ड का पठार में है।
  • दक्कन ट्रेप शैल समूह
    दरारी ज्वालामुखी से निकले बेसाल्ट युक्त लावा से निर्मित है। इसका विस्तार मैकल श्रेणी क्षेत्र के पूर्वी भाग, कोरबा, कवर्धा, सरगुजा, जशपुर आदि में है।
नोट: छत्तीसगढ़ में विंध्यन शैल समूहों का विस्तार नगण्य / कम रूप में है। छत्तीसगढ़ में टरसरी एवं क्वार्टरी क्रम की शैल समूह नहीं पायी जाती है।

छत्तीसगढ़ का पर्वत, पठार एवं पाट-प्रदेश

(A) पूर्वी बघेलखण्ड का पठार

  • सरगुजा बेसिन की संरचना में गोंड़वाना क्रम की चट्टानें अधिक हैं।
  • कैमूर पर्वत श्रृंखला कोरिया में स्थित है।
  • रामगढ़ की पहाड़ी सरगुजा में स्थित है जो सतपुड़ा पर्वत का भाग है। महाकवि कालिदास ने इसी पहाड़ी में मेघदूतम् नामक पुस्तक की रचना की।
  • सीता लेखनी की पहाड़ी सूरजपुर में है।
  • देवगढ़ की पहाड़ियां छत्तीसगढ़ राज्य के बघेलखण्ड पठार भौतिक प्रदेश के अन्तर्गत आती है।

मैकल श्रेणी

  • विस्तार राजनांदगाँव, कवर्धा, लोरमी एवं पेण्ड्रा तक (पश्चिम से पूर्व की ओर) है।
  • ऊँची चोटी बदरगढ़ की चोटी (1176 मी.), कबीरधाम जिले में स्थित है।
  • मैकल श्रेणी के कारण कबीरधाम जिला वृष्टिछाया क्षेत्र में आता है।
  • जल विभाजक: शिवनाथ नदी व वेनगंगा नदी के मध्य तथा यह श्रेणी ऊपरी महानदी बेसिन को ऊपरी नर्मदा बेसिन से अलग करती है।

(B) छत्तीसगढ़ का मैदान (महानदी बेसिन)

  • कड़प्पा क्रम (अवसादी क्रम) की चट्टानों से बना है तथा आकृति पंखाकार/चापाकार है।
  • छुरी उदयपुर की पहाड़ी बिलासपुर एवं रायगढ़ में विस्तृत है।
  • ऊँची चोटी दलहापहाड़ (760मी.) (अकलतरा, जांजगीर-चांपा) है।
  • सिहावा पर्वत धमतरी में है (महानदी का उद्गम स्थल), इसका प्राचीन नाम सुक्तिमती था।
  • छाता पहाड़ बलौदाबाजार में है।

(C) पाट प्रदेश

  • पठारी क्षेत्र के समतल ऊपरी भाग को 'पाट' कहते हैं। यह छोटा नागपुर के पठार का भाग है।
  • क्रम (पूर्व से पश्चिम): जमीर पाट > जारंग पाट > जशपुर पाट > मैनपाट।
  • मैनपाट (सरगुजा) को छत्तीसगढ़ का शिमला कहा जाता है, जहाँ 1962 में तिब्बती शरणार्थियों को बसाया गया था।
  • जशपुर पाट राज्य का सबसे बड़ा व लम्बा पाट प्रदेश है।
  • सामरी पाट की चोटी गौरलाटा (1225 मी.) राज्य की सबसे ऊँची चोटी है (बलरामपुर)।

(D) दण्डकारण्य पठार

  • विस्तार बस्तर संभाग, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आन्ध्रप्रदेश एवं ओडिशा में है।
  • रावघाट की पहाड़ी (कांकेर) लौह अयस्क के लिए प्रसिद्ध है।
  • बैलाडीला पहाड़ी (दंतेवाड़ा) से लौह अयस्क को विशाखापट्टनम बंदरगाह से जापान भेजा जाता है, जो छत्तीसगढ़ में सबसे पुरातन शैलों से बना है।
  • अबूझमाड़ पहाड़ी (नारायणपुर) छ.ग. का चेरापूंजी कहलाता है (सर्वाधिक वर्षा)। यह बस्तर के पठार का सबसे अधिक ऊँचाई वाला क्षेत्र है।

छ.ग. के जल विभाजक पर्वत

1. केशकाल पर्वतमहानदी व इन्द्रावती के मध्य।
2. मैकल पर्वत श्रेणीशिवनाथ व वेनगंगा के मध्य।
3. देवगढ़ की पहाड़ीमहानदी अपवाह एवं नर्मदा नदी अपवाह तंत्र के मध्य, तथा गोपद व रिहन्द के मध्य।

छत्तीसगढ़ की मिट्टियाँ

प्रदेश में पाये जाने वाले चट्टानों के आधार पर मुख्य रूप से 5 प्रकार की मृदा पायी जाती है-

1. लाल-पीली मिट्टी (50-55%)

  • स्थानीय नाम: मटासी।
  • विस्तार: छ.ग. के मध्य भाग तथा उत्तरी भाग में।
  • यह छ.ग. के सर्वाधिक भाग में पायी जाने वाली मिट्टी है।

2. लाल बलुई मिट्टी (25-30%)

  • स्थानीय नाम: रेतीली मिट्टी या टिकरा मिट्टी।
  • बस्तर के उच्च भूमि के ढालों पर पायी जाने वाली मिट्टी को टिकरा कहते हैं।

3. लाल दोमट मिट्टी (10-15%)

  • विस्तार: दंतेवाड़ा, सुकमा के कुछ भागों में।
  • जलधारण क्षमता सबसे कम होती है।

4. लेटेराइट मिट्टी

  • स्थानीय नाम: मुरूमी या भाठा मिट्टी (मिट्टी में छोटे पत्थर के साथ)।
  • कठोरता के कारण भवन निर्माण हेतु उपयोगी है, तथा ईंट निर्माण में इस मिट्टी का प्रयोग किया जाता है।

5. काली मिट्टी (कन्हार)

  • स्थानीय नाम: कन्हार / भर्ती / रेगुर।
  • निर्माण बेसाल्ट युक्त चट्टानों के अपरदन से (लावा निर्मित मिट्टी) हुआ है।
  • यह बारीक कणों वाली काली या गहरी भूरी रंग की होती है।
  • जलधारण क्षमता अधिक होने के कारण इसकी सतह पर चिका (Clay) की मात्रा सर्वाधिक होती है।

छ.ग. की मिट्टियों के स्थानीय नाम

स्थानीय नामविवरण
कन्हारकाली, गहरी भूरी मिट्टी (भर्ती, रेगुर, कपासी)
मटासीलाल-पीली मिट्टी
डोरसालाल-पीली (मटासी) एवं काली मिट्टी (कन्हार) के मिश्रण को डोरसा (Dorsa) कहते हैं
कछारीजलोढ़, लवण एवं जैविक पदार्थ युक्त मिट्टी
भाठामुरूम युक्त, छोटे पत्थरों सहित लेटेराईट मिट्टी

क्षेत्रीय मिट्टियों के स्थानीय नाम

बस्तर के पठार (उच्च से निम्न)उत्तरी पहाड़ी क्षेत्र
मरहानटिकरा
टिकराछावर
माल/बाड़ीगादछावर
गभारबाहरा
  • बस्तर के पठार में पाई जाने वाली मिट्टी (उच्च से निम्न): मरहान, टिकरा, माल, गभार।
  • परिया वह भूमि है जिस पर खेती न की जा रही हो।
  • लेटेराइजेशन का संबंध मिट्टी से है।
⚡ Active Recall • तुरंत स्व-मूल्यांकन

🎯 अभी इसी टॉपिक के 5 प्रश्न हल करें (Instant Topic Quiz)

विषय: छत्तीसगढ़ का भूगोल, भौतिक विभाजन एवं 33 जिले — ऊपर पढ़े गए नोट्स की तुरंत जाँच करें!

आपका लाइव स्कोर
0 / 5
अभ्यास प्रश्न #1 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 1: छत्तीसगढ़ की सर्वोच्च पर्वत चोटी "गौरलाटा (1225 मीटर)" किस भौतिक प्रदेश और किस जिले में स्थित है?

अभ्यास प्रश्न #2 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 2: छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा देश के कुल कितने राज्यों को स्पर्श करती है और सर्वाधिक लंबी सीमा किस राज्य के साथ है?

अभ्यास प्रश्न #3 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 3: भारतीय मानक समय रेखा (IST - 82°30' पूर्वी देशांतर) और कर्क रेखा (23°30' उत्तरी अक्षांश) छत्तीसगढ़ के किस जिले में एक-दूसरे को काटती हैं?

अभ्यास प्रश्न #4 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 4: छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक क्षेत्रफल में कौन-सी शैल समूह (Rock System) और कौन-सी मिट्टी पाई जाती है?

अभ्यास प्रश्न #5 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 5: छत्तीसगढ़ के कितने जिले पूर्णतः भू-आवेष्ठित (Landlocked - जिनकी सीमा किसी अन्य राज्य को नहीं छूती) हैं?

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