Premium Notes Library
36
CGपरीक्षामित्र
SMART STUDY HUB
Complete Coverage

ब्रिटिश प्रशासन एवं प्रमुख विद्रोह (British Admin & Revolts in CG)

CGPSC और व्यापम की परीक्षाओं के लिए डाक, यातायात व न्याय व्यवस्था तथा छत्तीसगढ़ के प्रमुख विद्रोहों (सोनाखान, सिपाही विद्रोह आदि) का स्मार्ट नोट्स संकलन।

डाक, यातायात व न्याय व्यवस्था

डाक एवं मुद्रा व्यवस्था

  • डाक व्यवस्था: रायपुर के डाक घर में पोस्टमास्टर की पदस्थापना। 1857 में रायपुर के डाकघर में पोस्टमास्टर के रूप में स्मिथ की नियुक्ति की गई।
  • मुद्रा व्यवस्था: 5 जून 1855 को मराठाकालीन नागपुरी रूपया बंद कर ईस्ट इंडिया कंपनी के सिक्के प्रारंभ किए गए।

यातायात एवं न्याय व्यवस्था

  • यातायात व्यवस्था:
    • 1887 में छत्तीसगढ़ रेलवे का बंगाल-नागपुर रेलवे में विलय।
    • 27 नवम्बर 1888 को प्रदेश में सर्वप्रथम रेल का संचालन बंगाल-नागपुर के मध्य प्रारंभ हुआ।
    • 1900 में बिलासपुर में रेल मण्डल की स्थापना (कलकत्ता रेलवे के अधीन)।
  • न्याय व्यवस्था: दीवानी तथा फौजदारी न्यायालय की व्यवस्था की गई। इलियट के शासनकाल में मराठाकालीन दोषपूर्ण न्याय व्यवस्था को समाप्त कर व्यापक सुधार किये गए।

छत्तीसगढ़ में हुए प्रमुख विद्रोह एवं क्रांतियां

सन्विद्रोहरियासत / जमींदारीनेतृत्वकर्त्ता
1818डोंगरगढ़ का विद्रोहडोंगरगढ़ रियासतजमींदार
1818माहारसाय का विद्रोहनवागढ़माहारसाय
1818-25धमधा का गोंड़ विद्रोहधमधाजमींदार
1819सोनाखान का विद्रोहसोनाखान जमींदारीरामराय सिंह
1830सावंत भारती विद्रोहधमधासावंत भारती
1830धमधा का गोंड़ विद्रोहधमधाजमींदार/राजा
1833बरगढ़ की क्रांतिबरगढ़ रियासतअजीत सिंह एवं पुत्र बलराम सिंह
1856सोनाखान का विद्रोहसोनाखान जमींदारीवीर नारायण सिंह
1857संबलपुर का विद्रोहसंबलपुर रियासतसुरेन्द्र साय
1857सारंगढ़ का विद्रोहसारंगढ़ रियासतकमलसिंह
1857सोहागपुर का विद्रोहकोरिया रियासतरंगाजी बापू
1858उदयपुर का विद्रोहसरगुजा रियासतकल्याण सिंह
1858सिपाही विद्रोहरायपुर बटालियनहनुमान सिंह
1918किसान उरांव विद्रोहकोरिया रियासतरामानुज प्रताप सिंहदेव

सोनाखान विद्रोह (1856 ई.)

  • वर्ष/स्थान: 1856 ई., सोनाखान (बलौदाबाजार)।
  • नेतृत्वकर्ता: वीर नारायण सिंह (सोनाखान के जमींदार थे, जो बिंझवार जनजाति के थे)।
  • कारण: अकाल पीड़ितों को अनाज उपलब्ध कराने के लिए वीरनारायण सिंह ने कसडोल के व्यापारी माखनलाल के गोदाम से अनाज लूटकर जनता में बांट दिया।

घटनाक्रम

  • 24 अक्टूबर 1856 में कैप्टन स्मिथ ने अनाज लूटने के आरोप में वीर नारायण सिंह को सम्बलपुर से गिरफ्तार कर रायपुर जेल में बंद कर दिया।
  • 27 अगस्त 1857 को वीर नारायण सिंह जेल से सुरंग बनाकर फरार हो गया।
  • 2 दिसम्बर 1857 को वीर नारायण सिंह ने आत्मसमर्पण कर दिया।

परिणाम एवं पदाधिकारी

  • 10 दिसंबर 1857 को वीरनारायण सिंह को रायपुर के जयस्तंभ चौक में चार्ल्स इलियट के फैसले के अनुसार फांसी दे दी गई।
  • वीर नारायण सिंह छ.ग. स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम शहीद कहलाये।
  • क्रांति के समय ब्रिटिश अधिकारी: नागपुर कमिश्नर (मि. प्लाउडन), डिप्टी कमिश्नर रायपुर (चार्ल्स सी. इलियट), पुलिस अधिकारी (कैप्टन स्मिथ)।

मुखबिर (ब्रिटिश सहयोगी)

इस महान आंदोलन में कुछ ब्रिटिश भक्तों के सहयोग के कारण यह विद्रोह सफल नहीं रहा। ये सहयोगी थे:

  • देवरी के जमींदार महराज साय (वीर नारायण सिंह के चाचा)।
  • भटगांव के जमींदार।
  • बिलाईगढ के जमींदार।
  • कटंगी के लोकसाय एवं त्रिलोक साय।
  • शिवरीनारायण के बाल पुजारी।

नोट: नारायण सिंह के बेटे गोविन्द सिंह ने सुरेन्द्रसाय (सम्बलपुर) के साथ मिलकर महराज साय की हत्या की。

सुरेन्द्र साय का विद्रोह / सम्बलपुर विद्रोह (1857)

  • वर्ष/स्थान: 1857, संबलपुर।
  • नेतृत्वकर्ता: सुरेन्द्र साय (संबलपुर के जमींदार)।
  • उपाधि: छत्तीसगढ़ का अंतिम शहीद।
  • सहयोगी: बलभद्र दाऊ (लखनपुर जमींदार), उदवंत साय (भाई), बलराम सिंह (चाचा)।

कारण

सम्बलपुर के चौहान राजा महराजसाय की मृत्यु बिना उत्तराधिकारी के हो गई। सुरेन्द्र साय का राजगद्दी पर वैध अधिकार बनता था, किन्तु अंग्रेजों ने विधवा रानी मोहनकुमारी को गद्दी पर बैठा दिया। बाद में मोहनकुमारी को हटाकर नारायणसिंह को शासक बनाया, जिसे गाँड़ समुदाय ने अपना अपमान समझा。

घटना क्रम

रामपुर के जमींदार अंग्रेज भक्त थे, इस कारण सुरेन्द्र साय ने सहयोगियों के साथ मिलकर दरयाब सिंह (रामपुर जमींदार) पर प्राणघातक हमला कर हत्या कर दी। सुरेन्द्र साय को गिरफ्तार कर हजारी बाग जेल में कैद किया गया。

  • 31 अक्टूबर 1857: हजारी बाग जेल से फरार।
  • 23 जनवरी 1864: पुनः गिरफ्तार कर असीरगढ़ के किले में कैद।
  • 28 फरवरी 1884: असीरगढ़ के किले में मृत्यु।

उदयपुर एवं सैन्य (सिपाही) विद्रोह

उदयपुर का विद्रोह (1858)

  • नेतृत्वकर्ता: कल्याण सिंह।
  • कारण: ब्रिटिश कम्पनी उदयपुर को अपने साम्राज्य में विलय करना चाह रही थी। जागीर के नरेश कल्याण सिंह एवं उनके भाई शिवराज सिंह व धीरज सिंह ने अंग्रेजी राज्य के विरूद्ध विद्रोह किया।
  • इस विद्रोह के लिए इन्हें सुरेन्द्र साय ने प्रेरित किया था।

सैन्य विद्रोह / रायपुर का सिपाही विद्रोह

  • वर्ष/स्थान: 1858, रायपुर।
  • नेतृत्वकर्ता: हनुमान सिंह (बैंसवाड़ा के राजपूत)।
  • हनुमान सिंह तीसरी बटालियन (Regiment) में मैग्जीन लश्कर पद पर कार्यरत् थे।
  • परिणाम: 22 जनवरी 1858 की सुबह 17 सिपाहियों को सरेआम फांसी पर लटका दिया गया।
⚡ Active Recall • तुरंत स्व-मूल्यांकन

🎯 अभी इसी टॉपिक के 5 प्रश्न हल करें (Instant Topic Quiz)

विषय: बस्तर का काकतीय वंश एवं प्रमुख जनजातीय विद्रोह — ऊपर पढ़े गए नोट्स की तुरंत जाँच करें!

आपका लाइव स्कोर
0 / 5
अभ्यास प्रश्न #1 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 1: बस्तर में काकतीय वंश के संस्थापक कौन थे जिन्होंने 1324 ई. में वारंगल से आकर बस्तर में शासन स्थापित किया?

अभ्यास प्रश्न #2 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 2: वर्ष 1910 के ऐतिहासिक "भूमकाल विद्रोह" के जननायक कौन थे और इस विद्रोह का प्रतीक चिन्ह क्या था?

अभ्यास प्रश्न #3 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 3: बस्तर के प्रथम शहीद किसे माना जाता है जिन्हें 20 जनवरी 1825 को परलकोट महल के सामने फांसी दी गई थी?

अभ्यास प्रश्न #4 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 4: बस्तर का प्रसिद्ध "मुरिया विद्रोह (1876)" किस शासक के काल में हुआ था और इसका नेतृत्व किसने किया?

अभ्यास प्रश्न #5 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 5: बस्तर के किस काकतीय शासक को जगन्नाथपुरी के शासक ने "रथपति" की उपाधि प्रदान की थी जिससे बस्तर में गोंचा पर्व प्रारंभ हुआ?

👆 किसी भी विकल्प पर क्लिक करके अपना उत्तर जांचें।