राजधानी: रत्नपुर। सूबेदार शासक नहीं होते थे अपितु मराठों के अधीन अधिकारी/प्रतिनिधि मात्र होते थे。
1. महिपत राव दिनकर (1788-90)
- छत्तीसगढ़ के प्रथम सूबेदार थे।
- शासन में सारी शक्तियां आनंदी बाई के हाथों में थी, जिनसे सत्ता संघर्ष हुआ।
- 1790 ई. में यूरोपियन यात्री फारेस्टर का आगमन।
2. विठ्ठलराव दिनकर (1790-1796)
- परगना पद्धति के जन्मदाता एवं लागूकर्ता (प्रमुख- कमाविसदार)।
- 1795 ई. में मिस्टर जे.टी. ब्लंट की यात्रा हुई।
4. केशव गोविंद (1797-1808)
- यूरोपीय यात्री कोलब्रुक ने यात्रा की।
- पिंडारी आक्रमणों से रक्षा की थी।
6. बिकाजी गोपाल (भीकाभाऊ) (1809-1817)
- पिंडारियों की गतिविधियां अपने चरम पर थी, लूट-पाट की घटनाएं हुई।
- सरगुजा रियासत जमींदारी में हस्तक्षेप (उत्तराधिकार संघर्ष)।
अन्य सूबेदार: 3. भवानी कालू (1796-97, सबसे कम समयावधि), 5. बिंकोजी पिंड्री (1808-1809), 7. सखाराम हरी एवं सीताराम टांटिया (1817), 8. यादव राव दिवाकर (1817-18, छ.ग. के अंतिम सूबेदार)।