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मराठा एवं ब्रिटिश शासन (Maratha & British Rule in CG)

CGPSC और व्यापम की परीक्षाओं के लिए मराठा शासन (प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष), सूबा शासन, ब्रिटिश अधीक्षक एवं छत्तीसगढ़ में ब्रिटिश शासन का स्मार्ट नोट्स संकलन।

प्रत्यक्ष मराठा शासन (1758-1787 ई.)

अप्रत्यक्ष मराठा शासन (1741-1758): 1. रघुनाथ सिंह 2. मोहन सिंह。

बिम्बाजी भोंसले (1758-1787ई.)

  • छत्तीसगढ़ में प्रथम मराठा शासक।
  • राजधानी: रतनपुर (मराठों की छ.ग. में प्रथम राजधानी)।
  • स्थापत्य: रामटेकरी मंदिर।
  • प्रशासनिक सुधार: रायपुर एवं रतनपुर का प्रशासनिक एकीकरण किया। मोहम्मद खान तारान को सैन्य सेवा में बहादुरी के बदले मदनगढ़ किले क्षेत्र के पांच स्थानों को भेंट किये।

बिम्बाजी की पत्नियां एवं उत्तराधिकारी

  • 1. आनंदीबाई: बिम्बाजी के मृत्यु उपरांत 1787-1801 ई. में सत्ता संभाली। सूबेदार महिपतराव के साथ सत्ता संघर्ष हुआ। रामटेकरी मंदिर में बिम्बाजी की प्रतिमा बनवाई।
  • 2. उमाबाई: सती हो गई, रतनपुर में सती चौरा निर्मित। 3. रमाबाई: वन चली गई।
  • चिमणाजी भोंसले (1787-1788ई.): भतीजे, 1788 ई. में रहस्यमय मृत्यु।
  • व्यंकोजी भोंसले (1788-1811ई.): छ.ग. में सूबेदारी प्रथा की शुरूआत की। 1790 ई. में यूरोपीय यात्री फारेस्टर रायपुर तथा 1795 को जे.टी. ब्लंट रतनपुर आये।

सूबा शासन (1788-1818 ई.)

राजधानी: रत्नपुर। सूबेदार शासक नहीं होते थे अपितु मराठों के अधीन अधिकारी/प्रतिनिधि मात्र होते थे。

1. महिपत राव दिनकर (1788-90)

  • छत्तीसगढ़ के प्रथम सूबेदार थे।
  • शासन में सारी शक्तियां आनंदी बाई के हाथों में थी, जिनसे सत्ता संघर्ष हुआ।
  • 1790 ई. में यूरोपियन यात्री फारेस्टर का आगमन।

2. विठ्ठलराव दिनकर (1790-1796)

  • परगना पद्धति के जन्मदाता एवं लागूकर्ता (प्रमुख- कमाविसदार)।
  • 1795 ई. में मिस्टर जे.टी. ब्लंट की यात्रा हुई।

4. केशव गोविंद (1797-1808)

  • यूरोपीय यात्री कोलब्रुक ने यात्रा की।
  • पिंडारी आक्रमणों से रक्षा की थी।

6. बिकाजी गोपाल (भीकाभाऊ) (1809-1817)

  • पिंडारियों की गतिविधियां अपने चरम पर थी, लूट-पाट की घटनाएं हुई।
  • सरगुजा रियासत जमींदारी में हस्तक्षेप (उत्तराधिकार संघर्ष)।
अन्य सूबेदार: 3. भवानी कालू (1796-97, सबसे कम समयावधि), 5. बिंकोजी पिंड्री (1808-1809), 7. सखाराम हरी एवं सीताराम टांटिया (1817), 8. यादव राव दिवाकर (1817-18, छ.ग. के अंतिम सूबेदार)।

ब्रिटिश अधीक्षक (1818-1830) एवं जिलेदार

1818 में पहली बार छत्तीसगढ़ अंग्रेजी शासन के अधीन हुआ। रघुजी तृतीय के अल्पायु होने के कारण ब्रिटिश सुपरिंटेंडेंट नियुक्त किए गए (नागपुर रेसिडेंट के अधीन)。

1. कैप्टन एडमंड (1818)

  • राजधानी: रतनपुर। छ.ग. के प्रथम ब्रिटिश अधीक्षक।
  • डोंगरगढ़ के जमींदार का विद्रोह हुआ, खैरागढ़ के जमींदार के सहयोग से दमन किया।

2. कैप्टन पी. वान्स एगेन्यू (1818-1825)

  • राजधानी 1818 ई में रतनपुर से रायपुर ले गए।
  • 27 परगनों को 8 में सीमित किया (बाद में 9)। पटेल पद समाप्त कर बरार पाण्डे, पोतदार, अमीन नियुक्त किए।
  • विद्रोह: नवागढ़ (1818), गोंड़ विद्रोह (1818-25), सोनाखान (1819), परलकोट (1824-25)।

पुनः भोंसला शासन (1830-1854 ई.) - जिलेदार व्यवस्था

  • रघुजी तृतीय (1830-1854) ने शासन जिलेदारों के माध्यम से संचालित किया (मुख्यालय रायपुर)।
  • कुल 8 जिलेदार नियुक्त हुए। पहला: कृष्णराव अप्पा, अंतिम: गोपाल राव।
  • विद्रोह: धमधा गोंड़ जमींदार (1830), बरगढ़ जमींदार (1833), तारापुर (1842-1854), मेरिया विद्रोह (1842-1863)।

मराठाकालीन शासन व्यवस्था

प्रशासनिक अधिकारी

  • सूबेदार: सूबा शासन का सर्वोच्च अधिकारी।
  • कमाविसदार: परगना का सर्वोच्च अधिकारी (सैनिक, दीवानी व फौजदारी प्रमुख)।
  • गौटिया: ग्राम स्तर पर सर्वोच्च पद। गांव का शासन, शांति सुरक्षा व राजस्व वसूली।
  • फड़नवीस: परगने का आय-व्यय हिसाब करने वाला सर्वोच्च लेखा अधिकारी।
  • पोतदार: खजांची का कार्य।
  • बड़कर: सामान्य स्थिति की सूचना देना।

राजस्व व्यवस्था (कर)

  • टकोली: जमींदारों से लिया जाने वाला वार्षिक कर।
  • सायर: आयात निर्यात कर।
  • कलाली: आबकारी कर / मादक पदार्थों का लाइसेंस शुल्क।
  • पंडरी: गैर कृषि मदों से लिया जाने वाला कर।
  • सेवई: अर्थदण्ड या जुर्माना राशि।
  • जमींदारी कर: आयात किये हुए अनाज पर कर।

विशेष तथ्य

  • प्रशासन दो भागों में था: 1. खालसा क्षेत्र (प्रत्यक्ष नियंत्रण) 2. जमींदारी क्षेत्र।
  • मराठों ने कल्चुरियों की प्रशासनिक व्यवस्था से केवल 'गौटिया' पद को जारी रखा।
  • छ.ग. में लाखा बांटा की प्रथा प्रचलित थी (हर साल किसान की भूमि बदल जाती थी ताकि उपजाऊ खेत सबको मिले)।

छत्तीसगढ़ में ब्रिटिश शासन (1854-1947)

13 मार्च 1854 को लार्ड डलहौजी ने व्यपगत सिद्धांत के तहत् नागपुर राज्य का विलय कर लिया। 1 फरवरी 1855 को जिलेदार गोपाल राव ने ब्रिटिश प्रतिनिधि को प्रशासन सौंपा。

प्रशासनिक पुनर्गठन

  • प्रथम डिप्टी कमिश्नर: चार्ल्स सी. इलियट (1854-1862), मुख्यालय रायपुर।
  • तहसीलों का गठन: 1854 से शुरूआत।
  • जिलों का निर्माण (1861): 2 नवम्बर 1861 को मध्यप्रांत गठन के समय 3 जिले (संबलपुर, बिलासपुर, रायपुर) थे।
  • संभाग व्यवस्था (1862): छ.ग. को मध्यप्रांत का संभाग बनाया (मुख्यालय रायपुर)।

भौगोलिक पुनर्गठन (1905)

  • बंगाल विभाजन के दौरान संबलपुर व 5 रियासतें (पटना, सोनपुर, रायखोल, बामरा, कालाहण्डी) बंगाल प्रांत के ओड़िशा में शामिल की गईं।
  • छोटा नागपुर की 5 रियासतें (कोरिया, चांगभखार, सरगुजा, उदयपुर, जशपुर) छ.ग. में शामिल की गईं।

राजस्व एवं अन्य व्यवस्थाएं

  • राजस्व: 3 भाग (ताहुतदारी, खालसा, जमींदारी)। मराठाकालीन गौटिया पद को 'मालगुजार' नाम दिया गया और 'मालगुलजारी बंदोबस्त' लागू किया गया।
  • ताहुतदारी: सैण्डिस (लोरमी 1826, तरेंगा 1828), रघुजी तृतीय (सिरपुर 1843, लवन 1848), इलियट (संजारी 1858, खल्लारी 1858, सिहावा 1858)।
  • पुलिस व्यवस्था (1862): अधीक्षक, सहायक अधीक्षक, थानेदार नियुक्त।
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🎯 अभी इसी टॉपिक के 5 प्रश्न हल करें (Instant Topic Quiz)

विषय: छत्तीसगढ़ में मराठा एवं ब्रिटिश शासन (Maratha & British Rule) — ऊपर पढ़े गए नोट्स की तुरंत जाँच करें!

आपका लाइव स्कोर
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अभ्यास प्रश्न #1 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 1: छत्तीसगढ़ में प्रथम स्वतंत्र मराठा शासक कौन थे जिन्होंने रतनपुर में "रामटेकरी मंदिर" का निर्माण कराया?

अभ्यास प्रश्न #2 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 2: छत्तीसगढ़ में "सूबा शासन पद्धति (Suba System)" का जनक कौन था और प्रथम सूबेदार किसे नियुक्त किया गया?

अभ्यास प्रश्न #3 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 3: ब्रिटिश अधीक्षक कैप्टन चार्ल्स इलियट के समय छत्तीसगढ़ को कब प्रथम बार स्वतंत्र "डिप्टी कमिश्नरी" बनाया गया?

अभ्यास प्रश्न #4 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 4: 1818 ई. में किस ब्रिटिश अधीक्षक ने छत्तीसगढ़ की राजधानी रतनपुर से स्थानांतरित कर "रायपुर" बनाई?

अभ्यास प्रश्न #5 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 5: मराठा काल में परगना पद्धति (Pargana System) का सूत्रपात किस सूबेदार ने किया था?

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