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छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ (Tribes of Chhattisgarh)

CGPSC और व्यापम की परीक्षाओं के लिए जनजातियों का परिचय, विशेष पिछड़ी जनजातियाँ, कार्य, युवा गृह, विवाह, नृत्य और प्रमुख जनजातियों का विवरण का संपूर्ण एवं स्मार्ट नोट्स संकलन।

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जनजातियों का सामान्य परिचय

  • छत्तीसगढ़ में 42 प्रकार की जनजातियाँ पायी जाती है जो 161 उपसमूहों में विभाजित है।
  • जनजातियों की सूची मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 में है।
  • छत्तीसगढ़ में जनजातीय अनुसंधान केन्द्र रायपुर में स्थापित है।
  • बस्तर को "जनजातियों की भूमि" कहा जाता है।
  • छत्तीसगढ़ के जनजातियों में सबसे बड़ा समूह गोंड़ है, जिसकी 41 उपजाति हैं।
  • नृजातीय म्यूजियम (Anthropological Museum, Jagdalpur) 1972 में स्थापित (एन्थ्रोपोलॉजिकल सर्वे ऑफ इण्डिया द्वारा)।

विशेष पिछड़ी जनजातियां

छत्तीसगढ़ में 7 (5+2) विशेष पिछड़ी जनजाति है:

  • 5 (केन्द्र सरकार द्वारा घोषित): अबूझमाड़िया, बैगा, कमार, बिरहोर, पहाड़ी कोरवा।
  • 2 (राज्य सरकार द्वारा घोषित): मुंजिया, पंडोप।

प्रमुख जनजातियों का निवास

  • मुरिया: कोण्डागांव, बस्तर व नारायणपुर।
  • अबूझमाड़िया: नारायणपुर, दंतेवाड़ा एवं बीजापुर (अबूझमाड़ क्षेत्र)।
  • गदबा: बस्तर संभाग (मूल निवासी उड़ीसा)।
  • कमार: गरियाबंद (छुरा एवं मैनपुर)।
  • परधान: बिलासपुर और कबीरधाम।
  • कंवर: बिलासपुर संभाग में बसाहट सर्वाधिक है।
  • उरांव: उत्तर-पूर्वी सीमा (जशपुर, रायगढ़, सरगुजा, बलरामपुर, सूरजपुर, कोरिया)।

गोदना (Tattoo)

  • गोदना शिल्पकार: कुंजर, बंजारा व ओझा (गोंड़)।
  • गोदना प्रिय जनजाति: बैगा।
  • सर्वाधिक गोदवाने वाली जनजाति: कमार।
  • 'झेला गोदना' बैगा जनजातियों की महिलायें अपने शरीर पर बनवाती हैं।

भाषायी वर्गीकरण एवं कार्य

जनजातियों का भाषायी वर्गीकरण

छ.ग. में मूलरूप से राज्य में आदिवासी तीन भाषा परिवार में विभाजित है:

मुण्डा भाषा परिवार
कोरकु, पहाड़ी कोरवा, खड़िया, मांझी, संवरा, निहाल, बिरहोर, नगेशिया, सौंता।
द्रविड़ भाषा परिवार
उरांव, परजा, कोंध, मुड़िया, माड़िया, गोंड़ी, दोरला, अबूझमाड़िया, पंडो।
आर्य भाषा परिवार
हल्बी, सदरी, भतरी, छत्तीसगढ़ी, गदबा, धुरवा, दण्डामी माड़िया, कमार, कंवर, बिंझवार, भुजिया, धनवार, भैना, बैगा, धाकड़, मिरगानी, देवार, मरार।
बस्तर अंचल की बोली: गोंड़ी, दोरली (सुकमा), हल्बी, भतरी, परधी।
बस्तर अंचल की मुख्य संपर्क बोली: हल्बी।

जनजातियों के कार्य (Occupation)

जनजातिकार्य
अगरियालौह शिल्पकला (अयस्क को गलाकर लोहा तैयार करते हैं)
कमारबांस शिल्पकला तथा टोकरी निर्माणकार्य करती है
कंडरा, बिरहोर, धनवारबाँस का बर्तन / शिल्पकला
हल्बाकृषि कार्य करते हैं तथा 'चिवड़ा (पोहा)' बनाते थे
धुरवामुख्यतः कृषि पर निर्भर, केन (गन्ना) से निर्मित वस्तुओं का विक्रय
कोरकूभूमि खोदने का कार्य करते हैं
खैरवारकत्था निकालने का कार्य करते हैं
पारधीकाले रंग के पक्षी का शिकार करते हैं
शिकारीछिंद पत्ते से चटाई, टोकरी एवं झाडू बनाने का कार्य

विवाह, देवी-देवता एवं युवा गृह

प्रचलित विवाह

  • पैडुल/चढ़ विवाह (गोंड़): लड़का लड़की के घर बारात लेकर जाता है।
  • पठौनी विवाह (गोंड़): लड़की बारात लेकर लड़के के घर जाती है।
  • हठ/पैठूल विवाह: लड़की द्वारा जबरदस्ती लड़के के घर जाकर विवाह करना। ढुकु विवाह (पहाड़ी कोरवा, अगरिया) भी महिला द्वारा पुरूष के घर घुस कर किया जाता है। भगेली/पोटा विवाह (गोंड़) में भी लड़की लड़के के घर जबरदस्ती रहती है।
  • क्रय/परिंगधन विवाह: वर द्वारा उपहार स्वरूप सामान देकर विवाह करना।
  • सेवा/चरधिया/लमसेना विवाह (गोंड़): वर द्वारा वधू मूल्य चुकाने हेतु अपने लमसेना (ससुराल) में सेवा देना।
  • विनिमय/गुंरावट विवाह: वर-वधू का आदान-प्रदान कर विवाह।
  • दुध लौटावा विवाह (गोंड़): ममेरे, फुफेरे भाई-बहन का विवाह।
  • अपहरण/पायसोतुर विवाह (गोंड़): युवक द्वारा युवती का अपहरण कर विवाह।

जनजातियों के देवी-देवता

उराँवसरना देवी
कोरवाखुड़िया रानी
कंवरसगराखण्ड
बैगाबुढ़ादेव

नोट: इस राज्य की जनजातियाँ पारलौकिक शक्ति के रूप में बोंगा देव को मानती हैं。

जनजाति का युवा गृह

  • मुरिया/मुड़िया (गोंड़) - घोटुल (Ghotul): पुरूष सदस्य (चेलिक) के प्रमुख सिरेदार, महिला सदस्य (मुटियारिन) के प्रमुख बेलोसा। नृत्य: हुलकीपाटा, मांदरी, ककसार। संदर्भ: सामाजिक शिक्षा, जीवनसाथी चुनाव, सेवा भाव।
  • उराँव - धुमकुरिया: पुरूष को घांगर कहते हैं।

जनजातियों का नृत्य, गीत एवं नाट्य

प्रमुख नृत्य

  • ककसार/काकसाड़ (मुड़िया/अबूझमाड़िया): घोटुल के देवता लिंगोपेन को आराधना करने के लिए।
  • माओ पाटा (मुड़िया): शिकार के समय यह नृत्य करते हैं।
  • करमा (बैगा, उरांव, कमार): जनजातियों में सर्वाधिक लोकप्रिय नृत्य। करमा / कर्म देवता को प्रसन्न करने हेतु।
  • बायसन हार्न/गौर सींग (माड़िया): गाँचा पर्व में भैंस के सींग लगाकर नृत्य। इसे "विश्व का सबसे सुंदर नृत्य" (वेरियर एल्विन) माना गया है।
  • सरहुल (उराँव): "उराँव जनजाति का आनुष्ठानिक नृत्य" है, जिसमें साल वृक्ष की पूजा की जाती है।
  • दमनच (पहाड़ी कोरवा): विवाह के अवसर पर किया जाता है, "सबसे भयानक नृत्य" माना गया है।
  • सैला/डंडा (गोंड़, बैगा): धान कटाई के पश्चात किया जाता है।
  • थापड़ी/ढांढल (कोरकू): बैसाख/आषाढ़ माह में, मेघनाथ खंब की स्थापना करते हैं।

जनजाति गीत

  • लिंगोपाटा गीत: परधान जनजाति (बस्तर अंचल)।
  • धनकुल/जगार गीत: हल्बा और भतरा (हल्बी भाषा)। वाद्ययंत्र: मटकी (धनकुल घड़ा), सूपा, बांस की खपच्ची एवं धनुष।
  • घोटुल पाटा गीत: मुड़िया जनजाति (हल्बी भाषा), मृत्यु के अवसर पर।

जनजाति नाट्य

  • माओपाटा (गौर नाट्य): मुड़िया जनजाति की शिकार पर आधारित नाट्य है (गोंड़ी भाषा में माओ = गौर, पाटा = नृत्य)।
  • भतरानाट: बस्तर के भतरा जनजाति द्वारा, इसमें केवल पुरुष ही भाग लेते हैं।

प्रमुख जनजातियों का विवरण

1. बैगा (Baiga)

  • उपजाति: बिंझवार, नरोतिया, भरोतिया, भैना, नाहर।
  • प्रमुख देवता: बूढ़ादेव (उड़द दाल का विशेष महत्व)।
  • कृषि: बेवार।
  • सर्वाधिक गोदना प्रिय जनजाति (झेला गोदना)।

2. कमार (Kamar)

  • निवास: गरियाबंद एवं आंशिक रूप से धमतरी।
  • प्रमुख कार्य: बांस शिल्प। पंचायत प्रधान: कुरहा।
  • रायपुर संभाग क्षेत्र का विशेष पिछड़ी जनजाति है।

3. उराँव (Uraon)

  • मुख्य रूप से सरगुजा, बलरामपुर, जशपुर, रायगढ़ क्षेत्र में।
  • युवागृह: घुमकुरिया (मुखिया को घाँगरमहतो कहते हैं)।
  • सर्वाधिक शिक्षित जनजाति है।

4. मुंजिया (Bhunjiya)

लाल बंगला से आशय रसोई घर से है।

5. हल्बा (Halba)

  • उपजाति: बस्तरिया, छत्तीसगढ़िया तथा मरेढिया।
  • मुख्य व्यवसाय: कृषि कार्य, पोहा/चिवड़ा बनाने का भी कार्य करते हैं।

6. बिंझवार (Binjhwar)

  • निवास: बलौदाबाजार, महासमुंद, रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़।
  • जाति चिह्न: तीर (तीर विवाह एवं सामान्य विवाह होता है)।
  • सोनाखान के वीरपुत्र, शहीद वीरनारायण सिंह इसी जनजाति से थे।

7. गदबा या गड़ाबा & धनवार

  • गदबा: बस्तर में (मूलतः ओड़िशा के हैं)।
  • धनवार: बांस बर्तन बनाने का कार्य।

8. अन्य विविध तथ्य

  • अगरिया (मैकल श्रेणी): लोहे गलाने का व्यवसाय।
  • कंवर: सैन्य कार्य करते हैं। 'पाइक' कंवर जनजाति से संबंधित है।
  • परधान: लिंगोपाटा गायन करते हैं।
  • कोया/दोरला: डोरली बोली बोलते हैं और पैडुल (विवाह नृत्य) करते हैं।
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विषय: छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ, युवागृह, लोकनृत्य, पर्व एवं संस्कृति — ऊपर पढ़े गए नोट्स की तुरंत जाँच करें!

आपका लाइव स्कोर
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अभ्यास प्रश्न #1 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 1: केंद्र सरकार द्वारा घोषित छत्तीसगढ़ की 5 "विशेष पिछड़ी जनजातियाँ (PVTGs)" कौन-सी हैं?

अभ्यास प्रश्न #2 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 2: जनजातीय युवागृह (Youth Dormitory) और संबंधित जनजाति का कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?

अभ्यास प्रश्न #3 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 3: विश्व प्रसिद्ध मानवाशास्त्री वेरियर एल्विन ने किस नृत्य को "संसार का सबसे सुंदर नृत्य" कहा था?

अभ्यास प्रश्न #4 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 4: तीजन बाई और झाड़ूराम देवांगन ने छत्तीसगढ़ की किस लोकगाथा को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई?

अभ्यास प्रश्न #5 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 5: छत्तीसगढ़ का प्रथम पारंपरिक पर्व "हरेली" किस माह में मनाया जाता है और इस दिन बच्चे किस पर चलते हैं?

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