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प्राचीन भारत का इतिहास (Ancient Indian History)

CGPSC और व्यापम की परीक्षाओं के लिए प्रागैतिहासिक काल से लेकर विजयनगर साम्राज्य तक के सबसे महत्वपूर्ण और प्रमाणित तथ्यों का रंगीन एवं स्मार्ट नोट्स संकलन।

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प्रागैतिहासिक काल

प्रागैतिहासिक काल (प्राक् + इतिहास) अर्थात् इस काल का इतिहास पूर्णतः पुरातात्विक साधनों पर निर्भर है। इस काल का कोई लिखित साधन उपलब्ध नहीं है, क्योंकि मानव का जीवन अपेक्षाकृत असभ्य एवं बर्बर था।

  • भारत में पुरापाषाण काल से सम्बन्धित पुरातात्विक खोज को करने का श्रेय राबर्ट ब्रूस फूट को दिया जाता है।
  • भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण के रॉबर्ट ब्रूस फूट ने वर्तमान तमिलनाडु राज्य के चिंगलपुट जिले के पल्लावरम् (चेन्नई के समीप) नामक पुरास्थल से 30 मई, 1863 ई. को लैटेराइट मिट्टी के जमाव से हस्त कुठार खोज निकाला था।
  • राबर्ट ब्रूस फूट को भारत में प्रागैतिहासिक पुरातत्व का जनक कहा जाता है।
  • भारतीय पुरातत्व विभाग के जन्मादाता अलेक्जेंटर कनिंघम को माना जाता है।
  • भारतीय पुरातत्व विभाग की स्थापना का श्रेय वायसराय लार्ड कर्जन को प्राप्त है।

मानव सभ्यता के इस प्रारम्भिक काल को सुविधानुसार तीन भागों में बाँटा गया है- (A) पुरापाषाण काल (Paleolithic Age), (B) मध्य पाषाण काल (Mesolithic Age), (C) नव पाषाण काल (Neolithic Age)।

(A) पुरापाषाण काल

  • उपकरणों पर आधारित पुरापाषाण कालीन संस्कृति के अवशेष सोहन नदी घाटी, बेलन नदी घाटी तथा नर्मदा नदी घाटी एवं भोपाल के पास भीमबेटका नामक स्थान से चित्रित शैलाश्रयों तथा अनेक चित्रित गुफाओं से प्राप्त हुआ है।
  • इस काल में हैण्ड ऐक्स, क्लीवर और स्क्रैपर आदि विशिष्ट यन्त्र प्राप्त हुए हैं।

(B) मध्य पाषाण काल

  • इस काल में प्रयुक्त होने वाले उपकरण बहुत छोटे होते थे इसलिए इन्हें 'माइक्रोलिथ' कहते हैं।
  • इस काल में मध्य प्रदेश में आदमगढ़ और राजस्थान में बागोर से पशुपालन के प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।

ऋग्वैदिक काल एवं प्रमुख दर्शन

  • परिषद् - प्रजा की सैनिक सभा जो बाद में चलकर राजा की सभा के रूप में कार्य करने लगी।
  • स्पश - जनता की गतिविधियों का देखने वाले गुप्तचर होते थे।
  • ऋग्वैदिक काल में निष्क गले का आभूषण होता था। यह मुद्रा के रूप में प्रचलित था।
  • आर. पी. चाँद ने सर्वप्रथम आर्यों के आक्रमणों का सिद्धान्त प्रतिपादित किया था।

प्रमुख दर्शन और उनके प्रवर्तक

दर्शन प्रवर्तक दर्शन प्रवर्तक
न्याय गौतम (न्यायसूत्र) पूर्व मीमांसा जैमिनी
योग पतंजलि उत्तर मीमांसा बादरायण
सांख्य कपिल वैशेषिक कणाद या उलूक
चार्वाक (भौतिकवादी) चार्वाक

बौद्ध धर्म (Buddhism)

महात्मा बुद्ध का जीवन परिचय
जन्म563 ई. पू.
जन्म स्थानकपिलवस्तु से 14 मील दूर लुम्बिनी वन में
पिता का नामशुद्धोधन (कपिलवस्तु के शासक)
माता का नाममहामाया (कोलिय की राजकुमारी)
बुद्ध के बचपन का नामसिद्धार्थ
बुद्ध के घोड़े का नामकंथक
बुद्ध की पत्नी का नामयशोधरा
बुद्ध के सारथि का नामचन्ना
बुद्ध के पुत्र का नामराहुल
बुद्ध का चचेरा भाईदेवदत्त
बुद्ध की मृत्यु483 ई. पू.. कुशीनगर (उ. प्र.) में
ज्ञान प्राप्ति (कैवल्य)बोधगया (पीपल वृक्ष के नीचे)
  • महात्मा बुद्ध द्वारा 29 वर्ष की अवस्था में गृह त्याग को महाभिनिष्क्रमण कहा गया।
  • गृह त्याग करने के बाद सिद्धार्थ ने वैशाली के आलारकलाम से सांख्य दर्शन की शिक्षा ग्रहण की। आलारकालाम सिद्धार्थ के प्रथम गुरु हुए।
  • महात्मा बुद्ध को उरूबेला (बोधगया) में पीपल के वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई।
  • महात्मा बुद्ध ने अपना पहला उपदेश सारनाथ (ऋषिपत्तनम्) में दिया था। बौद्ध परम्परा में इसे धर्मचक्रप्रवर्तन के नाम से जाना जाता है। सारनाथ में ही बौद्ध संघ की स्थापना हुई।
  • महात्मा बुद्ध ने जनसाधारण को अपने उपदेश पालि भाषा में दिये।
  • बिम्बिसार, उदयन एवं प्रसेनजित बुद्ध के प्रमुख अनुयायी थे।
  • भारत में मूर्ति पूजा की नींव बौद्ध धर्म ने रखी थी। बुद्ध की खड़ी प्रतिमा कुषाण काल में बनाई गई।
  • हीनयान अवस्था का विशालतम एवं सर्वाधिक विकसित शैलकृत चैत्यगृह कार्ले में स्थित है।
  • वज्रयान बौद्ध धर्म की शाखा सुल्तानी युग में सर्वाधिक प्रभावशाली थी।
  • नागार्जुन बौद्ध भिक्षु जिसने प्रथम सदी ई. में चीन जाकर बौद्ध कृतियों का चीनी भाषा में अनुवाद किया था। इन्हें भारत का आइंस्टीन भी कहा जाता है।
  • महायान सम्प्रदाय का उदय आन्ध्र प्रदेश में माना जाता है। महायान एक उत्कृष्ट मार्ग है। हीनयान निम्न मार्गी व रूढ़िवादी थे। हीनयान सम्प्रदाय के लोग श्रीलंका, बर्मा (म्यांमार) तथा जावा (इण्डोनेशिया) आदि देशों में पाये गये हैं।
  • शून्यवाद (माध्यमिक) व विज्ञानवाद (योगाचार) महायान सम्प्रदाय के अंग हैं।
बौद्ध संगीतियाँ
संगीतिवर्षस्थलअध्यक्षराज्यकाल
प्रथम 483 ई. पू. राजगृह महाकस्सप अजातशत्रु
उद्देश्य: बुद्ध के उपदेशों को दो पिटकों विनय पिटक व सुत्त पिटक में संकलित किया गया।
बुद्ध के जीवन से सम्बन्धित घटनाएँ व प्रतीक
जन्मकमल व साँड़
गृहत्यागघोड़ा
ज्ञानपीपल (बोधिवृक्ष)
निर्वाणपद चिह्न
मृत्युस्तूप

जैन धर्म (Jainism)

  • ऋषभदेव जैन धर्म के संस्थापक एवं प्रथम तीर्थंकर थे।
  • जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ थे। यह पार्श्वनाथ काशी (वाराणसी) के इक्ष्वांकु वंशीय राजा अश्वसेन के पुत्र थे।
  • जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी थे।
  • महावीर ने 30 वर्ष की उम्र में माता-पिता की मृत्यु के पश्चात् अपने बड़े भाई नन्दिवर्धन से अनुमति लेकर संन्यास जीवन को स्वीकार किया।
  • अनेकान्तवाद का सिद्धान्त (स्यादवाद) एवं दर्शन तथा अणुव्रत सिद्धांत जैन धर्म का है। जैन धर्म का आधारभूत सिद्धांत 'अहिंसा' है।
महावीर स्वामी का जीवन परिचय
प्रारम्भिक नामवर्द्धमान
जन्म599 ई. पू.
जन्म स्थानकुण्डग्राम (वैशाली)
पिता का नामसिद्धार्थ (जात्रक कुल के मुखिया)
माता का नामत्रिशला (लिच्छवि राज्य के राजा चेतक की बहन)
पत्नी का नामयशोदा (कुण्डिन्य और गोत्र की कन्या)
पुत्री का नामअणोज्जा या प्रियदर्शना
दामाद का नामजमालि (महावीर का प्रथम शिष्य)
ज्ञान की प्राप्ति (कैवल्य)जुम्भिकग्राम (ऋजुपालिका नदी के तट पर साल वृक्ष के नीचे)
प्रथम उपदेशराजगृह (विपुलाचन पहाड़ी पर वाराकर नदी तट पर)
प्रथम भिक्षुणीचन्दना (चम्पा नरेश दधिवाहन की पुत्री)
जैन संगीतियाँ
संगीतिवर्षस्थलअध्यक्ष
प्रथम 300 ई. पू. पाटलिपुत्र स्थूलभद्र
द्वितीय 513 ई. पू. बल्लभी देवर्धिक्षमाश्रमण
जैन तीर्थंकर तथा उनके प्रतीक
क्र.तीर्थंकरप्रतीक चिह्न
1.आदिनाथ या ऋषभनाथवृषभ या साँड़ अथवा बैल
2.अजितनाथहाथी (गज)
3.सम्भवनाथ(अश्व)
4.अभिनन्दननाथ(बन्दर)
5.सुमतिनाथ(चकवा) पक्षी
6.पद्मप्रभुपद्म
7.सुपार्श्वनाथश्रीवत्स
8.चन्द्रप्रभुमहिष (भैंसा)
9.सुविधिनाथ(सुअर)
10.शीतलनाथ(बाज पक्षी)
11.श्रेयांसनाथवज
12.वासु पूज्यनाथमृग (हरिण)
13.विमलनाथ(बकरा)
14.अनन्तनाथ(मछली)
15.धर्मनाथसर्पफण (पार्श्वनाथ को 'सर्पेश्वर' भी कहा जाता है)
16.शान्तिनाथघोड़ा
17.कुन्थुनाथकपि
18.अरनाथक्रौंच
19.मल्लिनाथस्वास्तिक
20.मुनिसुव्रतचन्द्रमा
21.नेमिनाथमकर
22.अरिष्टिनेमिगैंडा
23.पार्श्वनाथवाराह / श्येन / अज / मीन / कलश / कूर्म / नीलोत्पल / शंख
24.महावीरशेर (सिंह)

महाजनपदों का उदय एवं सिकन्दर

महाजनपदों का उदय

  • जैन ग्रन्थ 'भगवती सूत्र' तथा बौद्ध ग्रन्थ 'अंगुत्तर निकाय' में 16 महाजनपदों की सूची मिलती है।
  • सोलह महाजनपदों में अस्मक ही एक ऐसा जनपद था जो दक्षिण भारत में गोदावरी नदी के तट पर स्थित था।

सिकन्दर का आक्रमण

  • जन्म: 356 ई. पू. | पिता: फिलिप (मकदूनिया का शासक) | गुरु: अरस्तू | सेनापति: सेल्यूकस
  • भारत विजय अभियान के तहत् सिकन्दर ने 326 ई. पू. में बल्ख (बैक्ट्रिया) को जीतने के बाद काबुल होते हुए हिन्दूकुश पर्वत को पार किया।
  • तक्षशिला के शासक आम्भी ने आत्म-समर्पण के साथ उसका स्वागत करते हुए उसे आगे के अभियान में सहयोग का वचन दिया।
  • 326 ई. पू. में सिकन्दर को झेलम नदी के तट पर पौरव राज पोरस के साथ 'वितस्ता का युद्ध' करना पड़ा। इस युद्ध में पोरस की पराजय हुई। इस युद्ध को 'हाइडेस्पीज का युद्ध' नाम से भी जाना जाता है।
  • आगे के अभियान के लिए सिकन्दर के सैनिकों ने व्यास नदी पार करने से इनकार कर दिया।
  • सिकन्दर ने निकैया (विजयनगर) तथा बुकाफेला (घोड़े के नाम पर) नामक दो नगरों की स्थापना की।
  • सिकन्दर विजित भारतीय प्रदेशों को अपने सेनापति फिलिप को सौंपकर वापस लौट गया। लगभग 323 ई. में बेबीलोन में उसका निर्धन हो गया।
  • भारत में यूनानी प्रभाव वन्श 'क्षत्रप प्रणाली' और 'उलूक शैली' के सिक्कों का प्रचलन शुरू हुआ।

मौर्य साम्राज्य

चन्द्रगुप्त मौर्य

  • स्ट्रैबो, एरियन, जस्टिन और प्लूटार्क ने मौर्य वंश के संस्थापक चन्द्रगुप्त मौर्य को 'सैण्ड्रोकोट्टस' के नाम से पुकारा है। सर्वप्रथम सर विलियम जोंस ने सन् 1793 ई. में सैण्ड्रोकोट्टस की पहचान चन्द्रगुप्त मौर्य से की है।
  • विशाखदत्त कृत 'मुद्राराक्षस' में चन्द्रगुप्त को 'वृषल' या 'कुलहीन' कहा गया है।
  • तक्षशिला विश्वविद्यालय के आचार्य 'चाणक्य' थे। यह सिन्धु एवं झेलम नदियों के बीच स्थित था। चन्द्रगुप्त मौर्य के आचार्य चाणक्य (कौटिल्य / विष्णुगुप्त) ने सप्तांग सिद्धान्त (Saptang Theory) का प्रतिपादन किया। उनके अनुसार राज्य के अंग हैं- राजा, आमात्य, जनपद, दुर्ग, कोष, सेना एवं मित्र।
  • मैक्यावेली के 'प्रिंस' की तुलना कौटिल्य के अर्थशास्त्र से की जा सकती है। अभिधान चिन्तामणि में कौटिल्य के कई नामों का उल्लेख मिलता है।
  • पाटलिपुत्र में चन्द्रगुप्त का महल मुख्यतः लकड़ी का बना था।
  • जस्टिन ने चन्द्रगुप्त मौर्य की सेना को 'डाकुओं का गिरोह' कहा है। इसी ने सैण्ड्रोकोट्टस (चन्द्रगुप्त मौर्य) तथा सिकन्दर महान की भेंट का वर्णन किया है।
  • यूनानी लेखक प्लूटार्क के अनुसार, 'चन्द्रगुप्त ने छह लाख की सेना लेकर सम्पूर्ण भारत को रौंद डाला और उस पर अधिकार कर लिया।'
  • सेल्यूकस से युद्ध एवं सन्धि: चन्द्रगुप्त मौर्य ने सेल्यूकस को 305 ई. पू. में पराजित किया था, तत्पश्चात् हुई एक सन्धि के तहत् सेल्यूकस ने चन्द्रगुप्त को चार प्रान्त - एरिया, अराकोसिया, जेड्रोसिया और पेरीपेमिसडाई (काबुल, कन्धार, मकरान, हेरात) दहेज में दिये, जब चन्द्रगुप्त ने उसकी पुत्री से विवाह किया। प्लूटार्क के अनुसार चन्द्रगुप्त ने भी सेल्यूकस को 500 हाथी उपहार में दिये थे।

गुप्त साम्राज्य (स्वर्ण काल)

गुप्त सम्भवतः कुषाणों के सामन्त थे। गुप्त वंश की स्थापना श्रीगुप्त (275-300 ई.) ने की थी। गुप्त वंश का दूसरा शासक घटोत्कच (300-20 ई.) हुआ था।

चन्द्रगुप्त प्रथम

  • गुप्त वंश का पहला शासक था जिसने महाराजाधिराज की उपाधि ग्रहण की। उसने लिच्छवी राजकुमारी कुमार देवी से विवाह किया।
  • गुप्त संवत् (319-20 ई.) तथा शक संवत् (78 ई.) के बीच 241 वर्षों का अन्तर था।
  • गुप्तवंश में ही सर्वप्रथम चन्द्रगुप्त प्रथम ने ही रजत (चाँदी) मुद्राओं का प्रचलन करवाया था।

समुद्रगुप्त

  • इसके समय में गुप्त साम्राज्य का सर्वाधिक विस्तार हुआ। इतिहासकार विन्सेट स्मिथ ने समुद्रगुप्त को 'भारतीय नेपोलियन' कहा है।
  • प्रयाग स्तम्भ लेख: इसमें 'धर्म प्रचार बंधु' उपाधि का उल्लेख है। अकबर ने इसे कौशाम्बी से मँगाकर इलाहाबाद किले में रखवाया। इसमें बीरबल तथा जहाँगीर का भी लेख है। यह ब्राह्मी लिपि व संस्कृत भाषा में है। दरबारी कवि हरिषेण था।
  • विजय: 9 राजाओं को पराजित किया (अच्युत, नागसेन, गणपतिनाग प्रमुख)। दक्षिणापथ के 12 राजाओं को परास्त कर स्वतन्त्र किया (ग्रहण मोक्षानुग्रह)। अश्वमेध यज्ञ किया।
  • उपाधियाँ/अन्य: कविराज, वीणा बजाते हुए सिक्कों पर चित्र। वसुबन्धु को संरक्षण। वैष्णव था, विक्रमांक की उपाधि धारण की।

चन्द्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य)

  • अन्य नाम: देवगुप्त, देवराज, देवश्री। उपाधियाँ: विक्रमांक, विक्रमादित्य, परमभागवत।
  • विवाह नाग राजकुमारी कुबेरनागा से किया। पुत्री प्रभावती गुप्ता का विवाह वाकाटक नरेश रुद्रसेन द्वितीय से किया।
  • उदयगिरि गुहालेख: उद्देश्य 'सम्पूर्ण पृथ्वी को जीतना' (कृत्स्नपृथ्वीजय) था।
  • शकों को हराने के उपलक्ष्य में चाँदी के सिक्के चलाये, 'शकारि' की उपाधि।
  • नवरत्न: कालिदास, धन्वन्तरि, क्षपणक, अमरसिंह, शंकु, बेतालभट्ट, घटकर्पर, वराहमिहिर, वररुचि।
  • धर्मनिष्ठ वैष्णव था। सचिव वीरसेन शैव था, सेनापति आम्रकाद्दव बौद्ध था।
  • चीनी यात्री फाह्यान आया, जिसने MP को ब्राह्मणों का देश कहा। चीनी लेखक भारत को यिन-तु कहते हैं।

कुमारगुप्त प्रथम

  • वर्णन विलसड़ अभिलेख में मिलता है। छोटा भाई गोविन्दगुप्त बसाढ़ का राज्यपाल था।
  • सर्वाधिक अभिलेख इसी के मिलते हैं। मध्य एशिया की बर्बर जाति हूण का प्रथम आक्रमण इसी के समय हुआ।
  • नालन्दा विश्वविद्यालय की स्थापना की (ऑक्सफोर्ड ऑफ महायान बौद्ध)। अश्वमेध यज्ञ किया।

स्कन्दगुप्त एवं प्रशासन

  • कुशल प्रशासक। गिरनार पर्वत पर सुदर्शन झील के पुनरुद्धार का कार्य सौराष्ट्र के गवर्नर पर्णदत्त के पुत्र चक्रपालित को सौंपा।
  • 466 ई. में चीनी सांग सम्राट् के दरबार में राजदूत भेजा। राजधानी अयोध्या स्थानान्तरित की। हूणों ने आक्रमण किया था।
  • अन्तिम शासक भानुगुप्त था।
  • प्रशासन: सबसे बड़ा अधिकारी कुमारामात्य। प्रादेशिक इकाई देश (शासक- गोप्ता)। प्रान्तों को भुक्ति/प्रदेश/भोग (शासक- उपरिक, गोप्ता, भोगपति, राजस्थानीय)।

संगम युग, चन्देल वंश एवं विविध

संगम युग

  • चार वर्ण: अरसर (शासक), अण्डनर (ब्राह्मण), वेनिगर (वणिक) तथा वेलाल (वेलार किसान)।
  • तमिल ग्रंथ 'कुरल' को 'लघुवेद' की संज्ञा दी गई है।
  • तमिल रामायणम या रामावतारम् का लेखक कंबन था।

शंकराचार्य द्वारा स्थापित मठ

  1. गोवर्धनपीठ - पुरी (ओडिशा)
  2. शारदापीठ - द्वारका (गुजरात)
  3. ज्योतिषपीठ - बद्रीनाथ (उत्तराखण्ड)
  4. श्रृंगेरीपीठ - मैसूर (कर्नाटक)

चन्देल वंश

  • धंग: खजुराहो में भव्य मन्दिरों का निर्माण (जिननाथ, विश्वनाथ और वैद्यनाथ मन्दिर)।
  • गण्ड: 1008 ई. में महमूद गजनवी का सामना करने के लिए जयपाल के पुत्र आनन्दपाल के संघ में भाग लिया।
  • विद्याधर (1019-20 ई.): सर्वाधिक शक्तिशाली। गुर्जर-प्रतिहार शासक राज्यपाल को मारा (गजनवी से भागने के कारण)। परमार शासक भोज व कलचुरी गांगेय देव को पराजित किया। चन्देल साम्राज्य का चरमोत्कर्ष।
  • परमर्दिदेव (परमल): अन्तिम शक्तिशाली। 1182 में पृथ्वीराज तृतीय ने हराया। 1202 में ऐबक की अधीनता स्वीकारने पर मन्त्री जयदेव ने हत्या की।
  • खजुराहो चन्देलों की स्थायी राजधानी थी।

विविध महत्वपूर्ण तथ्य

  • गंग वंश के राजा राजमल चतुर्थ के मन्त्री व सेनापति 'चामुण्डराय' ने 974 ई. में श्रवणवेलगोला में गोमतेश्वर की विशाल प्रतिमा स्थापित करवायी।
  • वाकाटक वंश के शासक प्रवरसेन प्रथम ने चार अश्वमेध यथा तथा एक बाजपेय यज्ञ किया था।
  • पल्लव रथ मन्दिरों में द्रौपदी रथ मन्दिर सबसे छोटा तथा भीम रथ मन्दिर सबसे बड़ा है।
  • पुण्ड्रवर्धन भुक्ति राज्य उत्तरी बंगाल में स्थित था।
  • राजपूतों द्वारा मुस्लिम आक्रमणकारियों से स्त्रियों की रक्षा के लिए जौहर प्रथा का प्रचलन हुआ। इसमें सभी राजपूत पुरुषों के युद्ध में मारे जाने के पश्चात् किले में सभी स्त्रियाँ सामूहिक रूप से चिता में कूदकर अपनी जान दे देती थीं।

विजयनगर साम्राज्य

Historically Medieval
  • विजयनगर साम्राज्य की स्थापना मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल की अव्यवस्था के दौरान हुई।
  • स्थापना 1336 ई. में संगम के पाँच पुत्रों में से हरिहर और बुक्का नामक दो भाइयों ने की थी। ये आरम्भ में तेलंगाना राजा रुद्रप्रताप देव तृतीय के यहाँ नौकर थे।
  • संस्थापकों को प्रसिद्ध विद्वान् तथा सन्त माधव विद्यारण्य तथा उनके विख्यात अनुज वेदों के टीकाकार सायणाचार्य से प्रेरणा और सहायता मिली थी।
  • राजधानियाँ क्रमशः आंनेगोण्डी, विजयनगर, बेनुगोण्डा तथा चन्द्रगिरि थीं। विजयनगर का वर्तमान नाम हम्पी (हस्तिनावती) है।

संगम वंश (1336-1485)

  • हरिहर I: संस्थापक। राजधानी अनेगोण्डी, बाद में विजयनगर।
  • बुक्का I: 1374 में चीन को दूतमण्डल भेजा।
  • हरिहर II: 'महाराजाधिराज'/'राजपरमेश्वर' उपाधि। कनारा, मैसूर आदि पर आधिपत्य।
  • बुक्का II: रायचूर दोआब (विजयनगर-बहमनी संघर्ष की जड़) के लिए संघर्ष।
  • देवराय I: तुंगभद्रा पर बाँध/नहरें। इतालवी यात्री निकोलो कोण्टी आया। दरबार में श्रीनाथ (तेलुगू)। सेना में मुस्लिम भर्ती शुरू।
  • देवराय II: महान शासक। 'इस्माडिदेवराय', 'प्रौढ़ देवराय', 'गजबेटकर' (हाथियों का शिकारी)। बड़ी मात्रा में मुस्लिम भर्ती। ईरान के अब्बदुर्रज्जाक का भ्रमण।
  • विरुपाक्ष II को सामन्त नरसिंह ने पदच्युत किया (1486)।

सलुव वंश (1485-1505)

  • नरसिंह सलुव: संस्थापक। बहमनी व उड़ीसा राजाओं के विरुद्ध युद्ध कर प्रान्त पुनः विजित किये।
  • अरब व्यापारियों को अधिक घोड़े आयात करने का प्रलोभन व प्रोत्साहन दिया।
  • पुत्र अयोग्य सिद्ध हुए। राज शक्ति सेनापति नरसा नायक के हाथों में रही।
  • 1505 ई. में नरसा नायक के पुत्र वीर नरसिंह ने सालुव नरेश इम्माडि नरसिंह की हत्या करके सिंहासन पर अधिकार कर लिया (तुलुव वंश की स्थापना)।

तुलुव वंश (1505-1570)

  • वीर नरसिंह: संस्थापक (1505-09 ई.)।
  • कृष्णदेव राय (1509-29): बाबर ने अपनी आत्मकथा में इसे विजयनगर का महानतम शासक कहा।
  • अनेक सफल युद्ध किये। 1513 ई. में उड़ीसा के राजा गणपति प्रताप रुद्र को पराजित किया।
  • 1514 ई. में उदयगिरि का किला हस्तगत कर लिया।
⚡ Active Recall • तुरंत स्व-मूल्यांकन

🎯 अभी इसी टॉपिक के 5 प्रश्न हल करें (Instant Topic Quiz)

विषय: भारत का इतिहास — प्राचीन, मध्यकालीन एवं आधुनिक (Indian History) — ऊपर पढ़े गए नोट्स की तुरंत जाँच करें!

आपका लाइव स्कोर
0 / 5
अभ्यास प्रश्न #1 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 1: सिंधु घाटी सभ्यता का प्रसिद्ध बंदरगाह नगर (गोदीबाड़ा / Dockyard) "लोथल" किस नदी के किनारे स्थित था?

अभ्यास प्रश्न #2 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 2: गौतम बुद्ध के जीवन से संबंधित "चतुर्थ बौद्ध संगीति" किसके शासनकाल में और कहाँ आयोजित हुई थी?

अभ्यास प्रश्न #3 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 3: दिल्ली सल्तनत में "बाजार नियंत्रण प्रणाली (मूल्य नियंत्रण)" एवं घोड़ों को दागने व सैनिकों का हुलिया लिखने की प्रथा किसने प्रारंभ की?

अभ्यास प्रश्न #4 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 4: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के किस अधिवेशन में पहली बार "पूर्ण स्वराज (Purna Swaraj)" का प्रस्ताव पारित किया गया?

अभ्यास प्रश्न #5 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 5: स्थायी बंदोबस्त (Permanent Settlement - 1793), रैयतवाड़ी और महालवाड़ी व्यवस्था के जनक क्रमशः कौन थे?

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