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सामान्य हिन्दी व्याकरण (General Hindi Grammar)

VYAPAM, MPPSC, CGPSC, SI एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए। हिन्दी का इतिहास, वर्ण विचार, सन्धि, समास, शब्द भण्डार (तत्सम/तद्भव, विलोम) और मुहावरों का आकर्षक व रंगीन स्मार्ट नोट्स संकलन।

Visual Learning Concept

सामान्य हिन्दी — सम्पूर्ण माइंड मैप

हिन्दी व्याकरण व साहित्य

भाषा व विकास

  • संस्कृत ➔ पालि ➔ प्राकृत
  • अपभ्रंश ➔ अवहट्ट ➔ हिन्दी
  • राजभाषा (अनु. 343)

वर्ण व शब्द विचार

  • स्वर (11) व व्यंजन
  • अल्पप्राण / महाप्राण
  • संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण

संरचना व निर्माण

  • सन्धि (स्वर, व्यंजन, विसर्ग)
  • समास (6 प्रकार)
  • उपसर्ग एवं प्रत्यय

शब्द भण्डार

  • तत्सम / तद्भव
  • विलोम व पर्यायवाची
  • मुहावरे व लोकोक्तियां

हिन्दी भाषा का विकास एवं राजभाषा

भाषा परिवार एवं विकास क्रम

भाषा परिवार के आधार पर हिन्दी भारोपीय परिवार की भाषा है। भारत में बोलने वालों के प्रतिशत के आधार पर भारोपीय परिवार (73%) सबसे बड़ा भाषा परिवार है (द्रविड़ 25%, आस्ट्रिक 1.3%, चीनी तिब्बती 0.7%)।

संस्कृत पालि प्राकृत अपभ्रंश अवहट्ट हिन्दी

उपभाषा एवं बोलियां

  • पश्चिमी हिन्दी (शौरसेनी): ब्रजभाषा, खड़ीबोली, हरियाणवी, कन्नौजी।
  • पूर्वी हिन्दी (अर्द्ध मागधी): अवधी, बघेली, छत्तीसगढ़ी।
  • राजस्थानी हिन्दी: मारवाड़ी, मेवाती, जयपुरी, हाड़ौती।
  • बिहारी हिन्दी (मागधी): भोजपुरी, मगही, मैथिली।
  • हिन्दी, मराठी, नेपाली आदि देवनागरी लिपि में लिखी जाती हैं।

राजभाषा (संवैधानिक प्रावधान)

  • हिन्दी को 14 सितम्बर 1949 को संवैधानिक रूप से राजभाषा घोषित किया गया।
  • अनुच्छेद 120: संसद में प्रयोग की जाने वाली भाषा हिन्दी या अंग्रेजी होगी।
  • अनुच्छेद 343: संघ की राज्य भाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी।
  • अनुच्छेद 351: संघ हिन्दी भाषा का विकास और प्रसार करे।
  • 8वीं अनुसूची: मूल रूप से 14 भाषाएं थीं। वर्तमान में 22 भाषाएं हैं (सिंधी, कोंकणी, मणिपुरी, नेपाली, बोडो, डोंगरी, मैथिली, संथाली बाद में जुड़ीं)।

हिन्दी साहित्य का इतिहास एवं प्रमुख काल

काल (Era)प्रमुख कवि / रचनाकारमहत्वपूर्ण रचनाएं / विशेषताएं
आदिकाल (वीरगाथा काल)
1050 - 1350 ई.
चन्दबरदाई, विद्यापति, अमीर खुसरो, सरहपाचन्दबरदाई (पृथ्वीराज रासो)। डिंगल-पिंगल शैली। सिद्धों की संख्या 84 मानी जाती है।
भक्तिकाल (स्वर्ण काल)
1350 - 1650 ई.
कबीर (निर्गुण-ज्ञान), जायसी (निर्गुण-प्रेम), सूरदास (सगुण-कृष्ण), तुलसीदास (सगुण-राम)जायसी (पद्मावत), तुलसीदास (रामचरितमानस)। अष्टछाप की स्थापना विट्ठलनाथ ने की।
रीतिकाल (श्रृंगार काल)
1650 - 1850 ई.
केशवदास, बिहारी, घनानंद, भूषणकेशवदास (रामचन्द्रिका - कठिन काव्य का प्रेत)। घनानंद को प्रेम की पीर का कवि कहा जाता है।
आधुनिक काल (भारतेन्दु युग)
1850 - 1900 ई.
भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, प्रतापनारायण मिश्रगद्य के लिए खड़ी बोली का प्रयोग। नवजागरण का काल।
द्विवेदी युग
1900 - 1918 ई.
महावीर प्रसाद द्विवेदी, मैथिलीशरण गुप्त, हरिऔधसरस्वती पत्रिका का सम्पादन। हरिऔध का 'प्रियप्रवास' (खड़ी बोली का पहला महाकाव्य)।
छायावाद
1918 - 1936 ई.
जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, महादेवी वर्मा, सुमित्रानंदन पंतप्रसाद (कामायनी)। महादेवी वर्मा (यामा) को आधुनिक मीरा कहा जाता है।
प्रगतिवाद & प्रयोगवाद
1936 - 1951 ई.
मुंशी प्रेमचंद, नागार्जुन, दिनकर, अज्ञेयअज्ञेय (प्रयोगवाद के प्रवर्तक, तार सप्तक - 1943)। बहुजन सुखाय बहुजन हिताय।
दर्शन व प्रवर्तक अद्वैतवाद: शंकराचार्य
द्वैतवाद: माधवाचार्य
विशिष्टाद्वैत: रामानुजाचार्य
शुद्धाद्वैत: वल्लभाचार्य
महाकाव्य रामचरित मानस (तुलसीदास)
कामायनी (जयशंकर प्रसाद)
साकेत (मैथिलीशरण गुप्त)
गुरू-शिष्य परम्परा कबीरदास ➔ रामानन्द
सूरदास ➔ वल्लभाचार्य
मीराबाई ➔ रैदास
तुलसीदास ➔ बाबा नरहरिदास

वर्ण विचार (Phonology)

भाषा कि सबसे छोटी इकाई ध्वनि है और इस ध्वनि को वर्ण कहते है। वर्ण के समूह को वर्णमाला कहते हैं।

स्वर (Vowels)

मूलतः स्वरों की संख्या 11 है, (अं, अः को मिलाकर 13)।

  • ह्रस्व स्वर: उच्चारण में कम समय (अ, इ, उ - प्राकृतिक स्वर)।
  • दीर्घ स्वर: दुगना समय (आ, ई, ऊ, ऐ, ओ, औ)।
  • प्लुत स्वर: कई गुना समय लगता है (रा SSSSSS म)।
  • अयोगवाह: अं और अः (स्वतंत्र उच्चारण होता है)।

व्यंजन (Consonants)

  • स्पर्श व्यंजन: क वर्ग (कंठ), च वर्ग (तालू), ट वर्ग (मूर्धा), त वर्ग (दंत), प वर्ग (ओष्ठ)।
  • अंतःस्थ व्यंजन: य, र, ल, व।
  • ऊष्म/संघर्षी व्यंजन: श, स, ष, ह (घर्षण से गर्मी पैदा होती है)।
  • संयुक्त व्यंजन: क्ष (क्+ष), त्र (त्+र), ज्ञ (ज्+ञ), श्र (श्+र)।
  • उत्क्षिप्त/द्विगुण: ड़, ढ़।
घोषत्व के आधार पर: अघोष: तंत्रियों में कंपन न हो। (प्रत्येक वर्ग का 1st, 2nd वर्ण)。
सघोष (घोष): कंपन हो। (प्रत्येक वर्ग का 3rd, 4th, 5th वर्ण)。
प्राणत्व के आधार पर: अल्पप्राण: कम हवा निकले। (प्रत्येक वर्ग का 1st, 3rd, 5th वर्ण)。
महाप्राण: अधिक वायु निकले। (प्रत्येक वर्ग का 2nd, 4th वर्ण)。

शब्द भेद (संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया)

संज्ञा (Noun)

किसी प्राणी, वस्तु, भाव आदि के नाम को संज्ञा कहते हैं। इसके 5 भेद होते हैं:

  • व्यक्तिवाचक: राम, भारत, गंगा
  • जातिवाचक: मनुष्य, गाय, घड़ी
  • द्रव्यवाचक: लोहा, सोना, दूध, पानी
  • समूहवाचक: परिवार, संघ, सेना, गुच्छा
  • भाववाचक: क्रोध, मिठास, बुढ़ापा, वीरता

सर्वनाम (Pronoun)

संज्ञा के स्थान पर प्रयुक्त होने वाले शब्द। इसके 6 भेद हैं:

  • पुरुषवाचक: उत्तम (मैं, हम), मध्यम (तू, तुम), अन्य (वह, वे)
  • निश्चयवाचक: यह, वह
  • अनिश्चयवाचक: कोई, कुछ
  • संबंधवाचक: जो, सो
  • प्रश्नवाचक: कौन, क्या
  • निजवाचक: आप (स्वयं)

विशेषण (Adjective)

संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्द। प्रविशेषण वह है जो विशेषण की विशेषता बताए (जैसे- बहुत सुन्दर)। इसके 4 भेद हैं:

  • गुणवाचक: रंग, आकार, दोष (सुन्दर, दुष्ट)
  • परिमाणवाचक: नाप-तौल (निश्चित- 2 किलो, अनिश्चित- थोड़ी चाय)
  • संख्यावाचक: गणना (तीन बालक), क्रम (पहला), आवृत्ति (दुगुना)
  • सार्वनामिक: (यह आदमी विश्वासी है)

क्रिया (Verb)

काम का करना या होना। कर्म के आधार पर:

  • अकर्मक क्रिया: कर्म की आवश्यकता नहीं होती (मैं सोता हूँ, पक्षी उड़ते हैं)।
  • सकर्मक क्रिया: कर्म की आवश्यकता होती है। पहचान: 'क्या' या 'किसको' लगाने पर उत्तर मिले (वह पुस्तक पढ़ रहा है)।
  • प्रेरणार्थक क्रिया: कर्ता स्वयं न करके दूसरे को प्रेरणा दे (जगवाना, पिलवाना)।

सन्धि एवं समास (Sandhi & Samas)

सन्धि (3 प्रकार)

स्वर सन्धि के भेदनियम / सूत्रउदाहरण
1. दीर्घ स्वर सन्धिसमान स्वर मिलकर दीर्घ (अ+अ=आ, इ+इ=ई)विद्या + आलय = विद्यालय, परम + अर्थ = परमार्थ
2. गुण स्वर सन्धिअ/आ + इ/ई = ए | अ/आ + उ/ऊ = ओ | अ/आ + ऋ = अर्नर + इन्द्र = नरेन्द्र, महा + उत्सव = महोत्सव
3. वृद्धि स्वर सन्धिअ/आ + ए/ऐ = ऐ | अ/आ + ओ/औ = औमत + ऐक्य = मतैक्य, सदा + एव = सदैव
4. यण स्वर सन्धिइ/ई + भिन्न स्वर = य् | उ/ऊ + भिन्न = व् | ऋ + भिन्न = र्अति + अधिक = अत्यधिक, सु + आगत = स्वागत
5. अयादि स्वर सन्धिए➔अय्, ऐ➔आय्, ओ➔अव्, औ➔आव् (भिन्न स्वर आने पर)ने + अन = नयन, पो + अन = पवन, नौ + इक = नाविक
व्यंजन सन्धि (प्रमुख नियम)
  • वर्ग के 1st वर्ण का 3rd में परिवर्तन: वाक् + ईश = वागीश
  • वर्ग के 1st वर्ण का 5th में: वाक् + मय = वाङ्मय
  • 'त' संबंधी: उत् + लास = उल्लास, सत् + जन = सज्जन
  • 'म' संबंधी: सम् + योग = संयोग, सम् + मान = सम्मान
विसर्ग सन्धि (प्रमुख नियम)
  • विसर्ग का 'ओ': मनः + अनुकूल = मनोकूल
  • विसर्ग का 'र': निः + आशा = निराशा
  • विसर्ग का 'श, ष, स': निः + छल = निश्छल, नमः + ते = नमस्ते
  • विसर्ग का लोप व पूर्व स्वर दीर्घ: निः + रोग = नीरोग

समास (6 प्रकार)

"तत्पुरुष में विभक्ति, द्वन्द्व में और छिपाया, संख्या वाचक द्विगु, अव्ययी में अव्यय आया..."

1. अव्ययीभाव समास प्रथम पद अव्यय तथा प्रधान होता है।
उदा: आजन्म (जन्म से लेकर), भरपेट, रातोंरात।
2. तत्पुरुष समास उत्तर पद प्रधान, बीच में विभक्ति का लोप।
उदा: रसोईघर (रसोई के लिए घर), राजमहल।
3. कर्मधारय समास पहला पद विशेषण (उपमेय-उपमान)।
उदा: नीलकमल (नीला है जो कमल), चरणकमल।
4. द्विगु समास पहला पद संख्यावाचक होता है।
उदा: पंचवटी (पांच वटों का समूह), नवरत्न, अष्टाध्यायी।
5. द्वन्द्व समास दोनों पद प्रधान (और, या, अथवा का लोप)।
उदा: राधाकृष्ण (राधा और कृष्ण), दाल-रोटी।
6. बहुव्रीहि समास कोई पद प्रधान नहीं, तीसरा नया अर्थ निकलता है।
उदा: लम्बोदर (गणेश), दशानन (रावण), नीलकण्ठ।

उपसर्ग एवं प्रत्यय (Prefix & Suffix)

उपसर्ग (Prefix)

जो शब्दांश शब्दों के आदि (प्रारम्भ) में जुड़कर उनके अर्थ में विशेषता लाते हैं।

संस्कृत के उपसर्ग: अति (अत्यधिक), अनु (अनुचर), आ (आजीवन), निर् (निर्गुण), उप (उपहार)।
हिन्दी के तद्भव उपसर्ग: अ (अछूत), अध (अधकचरा), अन (अनपढ़), भर (भरपेट)।
अरबी-फारसी (विदेशी) उपसर्ग: खुश (खुशनसीब), गैर (गैरकानूनी), हम (हमराह), बा (बाइज्जत)।

प्रत्यय (Suffix)

जो शब्दांश शब्दों के अन्त में जुड़कर उनके अर्थ में परिवर्तन लाते हैं।

कृत् प्रत्यय: वे प्रत्यय जो धातु (क्रिया) में जोड़े जाते हैं (कृदन्त शब्द बनते हैं)。
उदा: लेख + अक = लेखक, लड़ + आई = लड़ाई।
तद्धित प्रत्यय: वे प्रत्यय जो संज्ञा, सर्वनाम या विशेषण में जुड़ते हैं。
उदा: सेठ + आनी = सेठानी, पण्डित + आई = पण्डिताई।

शब्द भण्डार (Vocabulary)

महत्वपूर्ण विलोम शब्द (Antonyms)

शब्दविलोमशब्दविलोम
अथइतिआकाशपाताल
अनाथसनाथअवनतीउन्नति
आरोहअवरोहजंगमस्थावर
तिमिरप्रकाशचलअचल
गरिमालघिमामूकवाचाल
श्रीगणेशइतिश्रीव्याससमास
अतरंगबहिरंगविपन्नसंपन्न
नीरससरसउन्मीलननिमीलन
क्षणिकशाश्वतऋजुवक्र
सकामनिष्कामआविर्भावतिरोभाव

महत्वपूर्ण पर्यायवाची शब्द (Synonyms)

शब्दपर्यायवाची
अग्निधनञजय, जातवेद, हुताशन, कृषानु, रोहिताश्व, आग, अनल, पावक
अनुपमअद्भुत, अनूठा, अपूर्व, अद्वितीय, अप्रतिम, अनोखा
अश्वहय, बाजि, तुरंग, घोटक, घोड़ा, रविसुत
आकाशगगन, नभ, अम्बर, अनन्त, अन्तरिक्ष, शून्य, अभ्र
कमलजलज्, अरविन्द, इन्दीवर, पंकज, नीरज
चन्द्रमानिशानाथ, इन्दु, शशि, शशांक, सुधाकर
जलतोय, पानी, वारि, नीर, सलिल, अम्बु, पय, जीवन
पृथ्वीधरा, अवनि, क्षिति, वसुधा, मेदिनी, इला
सूर्यआदित्य, भास्कर, दिवाकर, दिनकर, रवि, भानु
भौंरामधुकर, मधुप, अलि, भृंग, षट्पद

तत्सम - तद्भव शब्द

तत्सम: संस्कृत के शुद्ध शब्द (उज्ज्वल, अक्षि)। तद्भव: परिवर्तित रूप (उजला, आँख)।

आश्चर्य ➔ अचरज
अश्रु ➔ आंसू
इक्षु ➔ ईख
कच्छप ➔ कछुआ
घृत ➔ घी
प्रस्तर ➔ पत्थर
मयूर ➔ मोर
भ्रमर ➔ भँवर
मस्तक ➔ माथा
स्वप्न ➔ सपना
श्रावण ➔ सावन
अस्थि ➔ हड्डी

मुहावरे (Idioms)

मुहावराअर्थ
अंक भरनाप्यार से गोद में लेना
आँख की किरकिरी होनाआँखों को चुभनेवाला / अच्छा न लगना
उड़ती चिड़िया पहचाननामन की बात जानना
एक अनार सौ बीमारआवश्यकता से अधिक मांग
कच्चा चिट्ठा खोलनासब भेद खोल देना
गड़े मुर्दे उखाड़नापुरानी बातों पर प्रकाश डालना
छक्के छुड़ानापूरी तरह से परास्त कर देना
जंगल में मंगल होनानिर्जन स्थान में भी आनन्द का मिलना
डंके की चोट पर कहनास्पष्ट घोषणा करना
तलवार की धारसतर्कतापूर्ण जोखिमभरा कार्य
न घर का न घाट काजो कहीं का न हो; जिसका कहीं सम्मान न हो
⚡ Active Recall • तुरंत स्व-मूल्यांकन

🎯 अभी इसी टॉपिक के 5 प्रश्न हल करें (Instant Topic Quiz)

विषय: सामान्य हिन्दी व्याकरण (संधि, समास, तत्सम-तद्भव एवं शब्दावली) — ऊपर पढ़े गए नोट्स की तुरंत जाँच करें!

आपका लाइव स्कोर
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अभ्यास प्रश्न #1 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 1: "इत्यादि" और "स्वागत" शब्दों में क्रमशः कौन-सी संधि है?

अभ्यास प्रश्न #2 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 2: "पीतांबर (पीला है अंबर जिसका अर्थात् श्रीकृष्ण/विष्णु)" और "दशानन" में मुख्य रूप से कौन-सा समास है?

अभ्यास प्रश्न #3 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 3: हिंदी वर्णमाला में "क्ष, त्र, ज्ञ और श्र" किस प्रकार के व्यंजन कहलाते हैं?

अभ्यास प्रश्न #4 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 4: निम्नलिखित में से "तत्सम — तद्भव" का कौन-सा युग्म सही सुमेलित है?

अभ्यास प्रश्न #5 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 5: "जंगल में लगने वाली आग" के लिए एक शब्द क्या है?

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