पश्चिम वाहिनी (अरब सागर में गिरने वाली / एश्चुअरी बनाने वाली):
नर्मदा: अमरकंटक से उद्गम, विंध्य व सतपुड़ा के मध्य भ्रंश घाटी (Rift Valley) में बहती है, धुआंधार जलप्रपात बनाती है। डेल्टा नहीं बनाती, एश्चुअरी बनाती है।
ताप्ती: बैतूल (म.प्र.) के मुलताई से उद्गम, भ्रंश घाटी में बहती है।
अन्य: माही (कर्क रेखा को दो बार काटती है), साबरमती, लूनी (कच्छ के रन में विलीन होने वाली अंतःस्थलीय नदी), पेरियार।
पूर्व वाहिनी (बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली / डेल्टा बनाने वाली):
गोदावरी: त्र्यंबकेश्वर (नासिक) से उद्गम। प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी (1465 km), इसे 'वृद्ध गंगा' व 'दक्षिण गंगा' कहते हैं। सहायक: इंद्रावती, प्राणहिता, मंजरा, वेनगंगा, पेनगंगा।
कृष्णा: महाबलेश्वर से उद्गम। सहायक: तुंगभद्रा, भीमा, कोयना, घाटप्रभा, मालप्रभा।
कावेरी: ब्रह्मगिरि (कुर्ग, कर्नाटक) से उद्गम। इसे 'दक्षिण भारत की गंगा' कहा जाता है। श्रीरंगपट्टनम व शिवसमुद्रम द्वीपों का निर्माण करती है।