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भारतीय राजव्यवस्था एवं संविधान (Indian Polity & Constitution)

CGPSC और CG Vyapam के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण। संवैधानिक विकास (1773-1947), स्रोत, मूल कर्तव्य, राष्ट्रपति, निधियां, निर्वाचन आयोग, महत्वपूर्ण संविधान संशोधन और प्रमुख अनुच्छेदों का कलर-कोडेड स्मार्ट नोट्स संकलन।

Visual Learning Concept

भारतीय संविधान — सम्पूर्ण माइंड मैप

भारतीय राजव्यवस्था (Polity)

संवैधानिक विकास

  • 1773 रेगुलेटिंग एक्ट
  • 1858 क्राउन शासन
  • 1909 मार्ले-मिंटो

संरचना व स्रोत

  • संविधान सभा समितियां
  • 10+ देशों से स्रोत
  • अर्द्ध-संघात्मक स्वरूप

अधिकार व कर्तव्य

  • 11 मूल कर्तव्य (51A)
  • नीति निदेशक तत्व (36-51)
  • राष्ट्रपति कार्यपालिका

संस्थाएं व आयोग

  • संचित/आकस्मिक निधि
  • CAG (148) & AG (76)
  • निर्वाचन आयोग (324)

भारत का संवैधानिक विकास (Constitutional Development)

प्लासी का युद्ध (1757 ई.) तथा बक्सर का युद्ध (1764 ई.) में अंग्रेजों की सफलता के बाद बंगाल पर ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी के अनुसार शासन को संचालित करने का मार्ग प्रशस्त हुआ। भारत में संविधान निर्माण से पूर्व ब्रिटिश संसद द्वारा ऐसे अधिनियम/चार्टर पारित किये गये थे, जिन्हें भारतीय संविधान का आधार कहा जा सकता है:

रेगुलेटिंग एक्ट, 1773

  • ब्रिटिश प्रधानमन्त्री लॉर्ड नार्थ द्वारा 1772 ई. में गठित गुप्त समिति के प्रतिवेदन पर पारित।
  • बंगाल का शासन गवर्नर जनरल तथा चार सदस्यीय परिषद् में निहित किया गया।
  • मद्रास तथा मुम्बई प्रेसीडेंसी को बंगाल के अधीन किया गया व बंगाल के गवर्नर को तीनों का गवर्नर बनाया गया।
  • कलकत्ता में उच्चतम न्यायालय की स्थापना का प्रावधान (1 मुख्य न्यायाधीश + 3 अपर न्यायाधीश)।
  • सर एलिजा इम्पे कलकत्ता उच्चतम न्यायालय के प्रथम मुख्य न्यायाधीश नियुक्त हुए।
  • कम्पनी के संचालक मण्डल के सदस्यों का कार्यकाल 4 वर्ष किया गया।
  • वारेन हेस्टिंग्स को बंगाल का प्रथम गवर्नर जनरल बनाया गया।

पिट्स इण्डिया एक्ट, 1784

रेगुलेटिंग एक्ट की विसंगतियों, कम्पनी के कुशासन, अन्याय, अत्याचार के कारण कम्पनी की गिरती साख को बचाने के लिए यह अधिनियम पारित किया गया तथा 1784 ई. को पिट्स इण्डिया एक्ट द्वारा लागू वैध शासन प्रणाली समाप्त कर दी गयी।

भारत सरकार अधिनियम, 1858

  • भारत का शासन ईस्ट इण्डिया कम्पनी से लेकर ब्रिटिश क्राउन को सौंप दिया गया।
  • इसे "भारतीय स्वतन्त्रता का मैग्नाकार्टा" तथा "एक्ट फॉर दी बेटर गवर्नमेण्ट ऑफ इण्डिया" की संज्ञा दी गई।
  • गवर्नर जनरल को अब वायसराय की उपाधि मिली, जो क्राउन का सीधा प्रतिनिधि था।
  • भारत का शासन अब सम्राज्ञी द्वारा नियुक्त 15 सदस्यीय एक परिषद् को सौंप दिया गया, जिसका अध्यक्ष भारत राज्य सचिव के नाम से विभूषित किया गया।
  • भारत के लोगों को लोक सेवाओं में अपनी शिक्षा, योग्यता तथा विश्वसनीयता के आधार पर स्वतन्त्र तथा निष्पक्ष भर्ती के मूलवंश, लिंग, धर्म तथा निवास स्थान के आधार पर विभेद नहीं किया जायेगा।

भारतीय परिषद् अधिनियम, 1861

  • यह ऐसा पहला अधिनियम था, जिसमें विभागीय प्रणाली एवं मन्त्रिमण्डलीय प्रणाली की नींव रखी गई।
  • इस अधिनियम द्वारा ही भारतवासियों को अपने देश के प्रशासन में कुछ हिस्सा लेना सम्भव बनाया।
  • गवर्नर जनरल को पहली बार अध्यादेश जारी करने की शक्ति प्रदान की गई।
  • मुम्बई, चेन्नई तथा कोलकाता में उच्च न्यायालयों की स्थापना हुई।

1892 एवं 1909 के अधिनियम

  • 1892 अधिनियम: अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली की शुरुआत हुई। बजट पर बहस करने तथा कार्यकारिणी से प्रश्न पूछने की शक्ति दी गई, परन्तु मत डालने का अधिकार नहीं दिया गया था।
  • भारत सरकार अधिनियम, 1909 (मार्ले-मिण्टो सुधार): पहली बार मुस्लिम समुदाय के लिए पृथक् प्रतिनिधित्व का उपबन्ध किया गया, यही अधिनियम अन्ततः भारत विभाजन का कारण बना। पूरक प्रश्न पूछने और मत देने का अधिकार मिला।

संविधान सभा समितियां, स्रोत एवं विशेषताएं

संविधान सभा की प्रमुख समितियां एवं अध्यक्ष

समितिअध्यक्षसमितिअध्यक्ष
संघीय संविधान समितिपं. जवाहर लाल नेहरूपरामर्श समितिसरदार बल्लभ भाई पटेल
कार्य संचालन समितिके. एम. मुंशीराज्य समितिपं. जवाहर लाल नेहरू
सर्वोच्च न्यायालय समितिएस. वारदाचारियारमूल अधिकार उपसमितिजे. बी. कृपलानी
अल्पसंख्यक उपसमितिएच. सी. मुखर्जी

भारतीय संविधान के प्रमुख विदेशी स्रोत

संयुक्त राज्य अमरीका मौलिक अधिकार, न्यायिक पुनरावलोकन, संविधान की सर्वोच्चता, स्वतन्त्र न्यायपालिका का गठन व शक्तियाँ, निर्वाचित राष्ट्रपति व उस पर महाभियोग, उपराष्ट्रपति का पद, उच्चतम एवं उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों को हटाने की प्रक्रिया।
ब्रिटेन मंत्रिमंडलीय सरकार, संसदीय शासन प्रणाली, एकल नागरिकता एवं विधि निर्माण प्रक्रिया।
कनाडा संघात्मक शासन व्यवस्था, अवशिष्ट शक्तियाँ (Residual Power) केन्द्र के पास, केन्द्र-राज्य सम्बन्ध, राज्यपाल की नियुक्ति विषयक प्रक्रिया, विधेयक सुरक्षित रखना।
आयरलैण्ड राज्य के नीति निदेशक तत्त्व, राष्ट्रपति निर्वाचन के लिए निर्वाचक मण्डल की व्यवस्था, राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा में 12 सदस्यों का मनोनयन।
जर्मनी आपात-उपबन्ध।
ऑस्ट्रेलिया समवर्ती सूची, केन्द्र-राज्य के बीच शक्तियों का विभाजन, प्रस्तावना की भाषा।
दक्षिण अफ्रीका संविधान संशोधन की प्रक्रिया।
रूस मौलिक कर्त्तव्य, पंचवर्षीय योजना।
जापान व फ्रांस जापान: कानून (विधि) द्वारा स्थापित प्रक्रिया | फ्रांस: गणतन्त्रात्मक शासन व्यवस्था।

भारतीय संविधान की विशेषताएं

1. लिखित एवं निर्मित संविधान: भारत का संविधान, संविधान सभा द्वारा लिखित रूप से निर्मित किया गया है, जबकि ब्रिटेन का संविधान अलिखित है।
2. विशाल संविधान: हमारे संविधान में 22 भाग, 395 अनुच्छेद तथा 12 अनुसूचियाँ हैं, परन्तु संख्या के आधार पर अब इसमें 444 अनुच्छेद और 26 भाग हैं।
3. वयस्क मताधिकार: संविधान के 61वें संशोधन के द्वारा यहाँ वयस्क मताधिकार की आयु 18 वर्ष कर दी गयी है।
4. संघात्मक एवं एकात्मक तत्त्वों का समन्वय (अर्द्ध-संघात्मक / Quasi federal):
संघात्मक लक्षण: लिखित संविधान, संविधान की सर्वोच्चता, सर्वोच्च न्यायालय, शक्तियों का विभाजन (केन्द्र व राज्य के बीच), कठोर संविधान।
एकात्मक लक्षण: शक्तियों का विभाजन केन्द्र के पक्ष में, इकहरी नागरिकता, राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा, राष्ट्रपति की संकटकालीन शक्तियों, आर्थिक दृष्टि से राज्यों का केन्द्र पर निर्भर रहना।

मूल कर्तव्य, नीति निदेशक तत्व व राष्ट्रपति

मूल कर्तव्य (Fundamental Duties) भाग 4 (क) | अनुच्छेद 51(क)

स्वर्ण सिंह समिति की रिपोर्ट के आधार पर 42वें संविधान संशोधन 1976 द्वारा संविधान के भाग 4 में एक नया अध्याय भाग 4 (क) जोड़ा गया है, जिसमें नागरिकों के मूल कर्त्तव्यों का उल्लेख किया गया है। 86वें संविधान संशोधन के द्वारा 11वाँ मूल कर्त्तव्य जोड़ा गया है। मौलिक कर्त्तव्यों को न्यायालय द्वारा लागू नहीं करवाया जा सकता।

(1) संविधान का पालन करें, राष्ट्र ध्वज, राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान का आदर करें।
(2) स्वतन्त्रता आन्दोलन को प्रेरित करने वाले आदर्शों को हृदय में सँजोयें।
(3) भारत की प्रभुता, एकता और अखण्डता की रक्षा करें और उसे अक्षुण्ण रखें।
(4) देश की रक्षा तथा राष्ट्र की सेवा करें।
(5) भ्रातृ भावना का निर्माण करें।
(6) सामाजिक, सांस्कृतिक परम्परा के महत्त्व को समझें।
(7) प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा करें।
(8) मानववाद तथा सुधार की भावना का विकास करें।
(9) सार्वजनिक सम्पत्ति की सुरक्षा करें।
(10) सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ें, जिससे राष्ट्र की प्रगति हो।
(11) माता-पिता या अभिभावकों का कर्त्तव्य है कि 6 से 14 वर्ष के बच्चों हेतु प्राथमिक शिक्षा प्रदान कराना (86वें संविधान संशोधन)।

राज्य के नीति निदेशक सिद्धान्त (DPSP)

  • संविधान के भाग 4 के अधीन अनुच्छेद 36 से 51 तक राज्य के नीति निदेशक सिद्धान्तों का उल्लेख किया गया है।
  • ये न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं होते।
  • अधिकांशतः नीति निदेशक तत्त्वों का उद्देश्य आर्थिक तथा सामाजिक लोकतन्त्र स्थापित करना है, अर्थात् कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना है।

संघ की कार्यपालिका : राष्ट्रपति

  • संविधान के अनुच्छेद 52 के अनुसार, देश में एक राष्ट्रपति होगा।
  • संघीय कार्यपालिका की शक्ति राष्ट्रपति में निहित है (अनुच्छेद 53)।
  • राष्ट्रपति का निर्वाचक मण्डल:
    1. संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य।
    2. राज्यों की विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य होंगे।
    3. मई, 1992 में 70वें संविधान संशोधन के द्वारा पाण्डिचेरी (पुदुचेरी) तथा दिल्ली की विधान सभाओं को भी इस निर्वाचक मण्डल में सम्मिलित किया गया है।
  • नोट-राष्ट्रपति के निर्वाचक मण्डल में संसद और विधान सभाओं के मनोनीत सदस्य सम्मिलित नहीं होंगे।

भारत की निधियां, महान्यायवादी एवं CAG

भारत की संचित निधि अनुच्छेद 266(1)

संचित निधि से धन अनुदान माँगों के द्वारा ही व्यय किया जाता है। सरकार को मिलने वाले सभी राजस्वों जैसे-सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क, सम्पदा शुल्क, आयकर व अन्य शुल्क और सरकार द्वारा दिये गये ऋणों की वसूली से जो धन प्राप्त होते हैं, वे संचित निधि में जमा किये जाते हैं। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, नियन्त्रक एवं महालेखा परीक्षक, सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन, राज्यसभा के सभापति, उपसभापति, लोकसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष आदि के वेतन एवं भत्ते संचित निधि पर भारित होते हैं।

भारत की आकस्मिक निधि अनुच्छेद 267

यह निधि राष्ट्रपति के नियन्त्रण में होती है तथा देश में उत्पन्न होने वानी आकस्मिक घटनाओं का सामना करने के लिए राष्ट्रपति इस निधि से सरकार को आवश्यक धन देता है। संसद से इस राशि की स्वीकृति लेना अनिवार्य है। विशेष परिस्थितियों में राष्ट्रपति अग्रिम रूप से इस निधि से धन निकाल सकते हैं।

महान्यायवादी (AG) अनुच्छेद 76

  • महान्यायवादी भारत सरकार का विधि अधिकारी होता है।
  • नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और राष्ट्रपति ऐसे किसी व्यक्ति की नियुक्ति करेगा, जिसमें उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने की योग्यता हो।
  • राष्ट्रपति के प्रसाद-पर्यन्त पद को धारण करेगा।
  • लोक सभा अथवा राज्य सभा में या संयुक्त अधिवेशन में भाग लेने और भाषाण देने का अधिकार प्राप्त है, परन्तु वह मतदान में भाग नहीं ले सकता क्योंकि वह संसद का सदस्य नहीं है।

नियन्त्रक-महालेखा परीक्षक (CAG) अनुच्छेद 148

  • इस पद का सृजन सर्वप्रथम 1857 में लॉर्ड कैनिंग के द्वारा किया गया।
  • यह भारत सरकार के लेखों का लेखा परीक्षण कर अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है तथा राज्य सरकारों के लेखों का लेखा परीक्षण कर रिपोर्ट सम्बन्धित राज्य के राज्यपाल को सौंपता है।
  • नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
  • केवल सिद्ध कदाचार या असमर्थता के आधार पर ही महाभियोग की प्रक्रिया द्वारा पदच्युत किया जा सकता है (सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान पद्धति)।

निर्वाचन आयोग, EVM एवं NOTA

  • निर्वाचन आयोग का गठन 25 जनवरी, 1950 को संविधान लागू होने से एक दिन पूर्व किया गया था। इसी कारण वर्ष 2011 से 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  • संविधान के भाग 15 के अनुच्छेद 324 से 329 के बीच निर्वाचन से सम्बन्धित उपबन्ध किया गया है।
  • मुख्य निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल 6 वर्षों या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो तब तक होगा। अन्य आयुक्तों का कार्यकाल 6 वर्षों या 62 वर्ष जो भी पहले हो, तब तक रहता है।
  • दिनेश गोस्वामी समिति की सिफारिशों पर अक्टूबर, 1993 से निर्वाचन आयोग को 'तीन सदस्यीय आयोग' बना दिया गया।
  • मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने के लिए संसद द्वारा उसी प्रकार महाभियोग की कार्यवाही की जाती है, जैसे उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के विरुद्ध की जाती है।
  • भारत में पहली बार 1952 में चुनाव सम्पन्न कराया गया। भारत की निर्वाचन प्रणाली ब्रिटेन के अनुरूप है।
  • श्रीमती रमा देवी एकमात्र महिला मुख्य निर्वाचन आयुक्त (कार्यवाहक) रही हैं।
  • भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त टी. एन. शेषन थे, जिन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद राष्ट्रपति का चुनाव लड़ा था, परन्तु हार गए।
  • किसी चुनाव में यदि कोई प्रत्याशी कुल पड़े वैध मतों का न्यूनतम 1/6 मत प्राप्त नहीं करता है तो वह अपनी जमानत राशि खो देता है।

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM)

  • इलेक्ट्रॉनिक कॉरपोरेशन ऑफ इण्डिया द्वारा निर्मित EVM का प्रथम प्रदर्शन 1979 में किया गया था।
  • वर्ष 1982 में केरल विधानसभा चुनाव में पारूर (थरूर) विधानसभा क्षेत्र में प्रायोगिक तौर पर सर्वप्रथम इस्तेमाल हुआ।
  • सर्वप्रथम 1999 में गोवा विधान सभा के सम्पूर्ण चुनावों में इस्तेमाल किया गया।
  • वर्ष 2004 में (14वीं लोक सभा) सम्पन्न हुए आम चुनावों में सभी संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में इस्तेमाल किया गया।
  • नवम्बर, 2009 में किन्नरों के लिए तीसरी श्रेणी का प्रावधान किया गया।

नोटा (NOTA)

  • उच्चतम न्यायालय के 27 सितम्बर, 2013 के आदेश का अनुसरण करते हुए 11 अक्टूबर, 2013 को EVM में 'नोटा' विकल्प लागू किया गया था।
  • भारत निर्वाचन आयोग ने 18 सितम्बर, 2015 को 'नोटा' के लिए प्रतीक चिह्न जारी किया।
  • नोटा विकल्प चिह्न को भारतीय डिजाइन संस्थान (एनआईडी) अहमदाबाद ने डिजाइन किया है।
  • उद्देश्य: ऐसे मतदाताओं की सहायता करना है जो किसी भी उम्मीदवार को वोट देना नहीं चाहते हैं और अपने निर्णय की गोपनीयता बनाए रखना चाहते हैं।

सिविल सर्विसेज के गठन से सम्बन्धित आयोग

1886 ई.

एचीसन आयोग

इस आयोग ने स्टेच्यूटरी सिविल सर्विस को समाप्त करके प्रान्तीय लोक सेवाओं की स्थापना की सिफारिश की। सरकार ने दो कैडर इम्पीरियल सेवाएँ तथा प्रान्तीय सेवाएँ बनायीं।

1917 ई.

इस्लिंगटन आयोग

इसने सेवाओं के कार्य के आधार पर तीन वर्ग फर्स्ट, सेकण्ड तथा थर्ड क्लास बनाने की सिफारिश की।

1923 ई.

ली आयोग

इसने लोक सेवाओं के वर्गीकरण, भर्ती के लिए लोक सेवाओं की स्थापना तथा 'कॉडरवाइज' भारतीयकरण को बढ़ावा तथा अच्छे वेतन एवं सुविधाओं की सिफारिश की।

विशेष: भारत सरकार अधिनियम, 1919 वह प्रथम अधिनियम था, जिसके द्वारा इम्पीरियल सेवाओं को व्यवस्थित रूप प्रदान करने का प्रयास किया गया।

प्रमुख संविधान संशोधन एवं महत्वपूर्ण अनुच्छेद

महत्वपूर्ण संविधान संशोधन

97वाँ संशोधन
सहकारी समितियां नाम से एक नया भाग-IX (ख) संविधान में जोड़ा गया [अनुच्छेद-243 य ज से 243 य न]।
98वाँ संशोधन (2012)
संविधान में अनुच्छेद-371 (जे) शामिल किया गया। उद्देश्य कर्नाटक के राज्यपाल को हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र के विकास हेतु सशक्त करना था।
99वाँ संशोधन (2014)
राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग की स्थापना।
100वाँ संशोधन (2015)
भारत-बांग्लादेश भूमि हस्तांतरण।
101वाँ संशोधन (2017)
इसके द्वारा वस्तु एवं सेवा कर (GST) को लागू किया गया।

परीक्षा उपयोगी प्रमुख अनुच्छेद

अनुच्छेदप्रावधान (विषय)
अनुच्छेद 1यह घोषणा करता है कि 'भारत अर्थात् इण्डिया राज्यों का संघ' है।
अनुच्छेद 3संसद विधि द्वारा नये राज्य बना सकती है तथा पहले से अवस्थित राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं एवं नामों में परिवर्तन कर सकती है।
अनुच्छेद 5संविधान के प्रारम्भ होने के समय प्रत्येक व्यक्ति जिसका भारत के राज्य क्षेत्र में अधिवास है, वह भारत का नागरिक होगा।
अनुच्छेद 14राज्य भारत के किसी राज्य क्षेत्र में किसी व्यक्ति को समता से या विधियों के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा।
अनुच्छेद 17अस्पृश्यता का उन्मूलन किया जायेगा। अस्पृश्यता से उत्पन्न होने वाली निर्योग्यता को लागू करना अपराध घोषित किया गया है।
अनुच्छेद 19इसमें स्वतन्त्रता के अधिकार की गारण्टी दी गयी है।
अनुच्छेद 22गिरफ्तार और विरोध से संरक्षण।
अनुच्छेद 2414 वर्ष से कम उम्र के किसी बालक को किसी कारखाने या खान में काम करने के लिए नियोजित नहीं किया जायेगा।
अनुच्छेद 32मौलिक अधिकारों के हनन के मुद्दे पर कोई व्यक्ति सीधे उच्चतम न्यायालय में जा सकता है। इसे 'संविधान की आत्मा' कहा गया है।
अनुच्छेद 41कार्य शिक्षा, लोक सहायकता प्राप्त करने का अधिकार।
अनुच्छेद 42राज्य काम की न्यायसंगत तथा मानवोचित दशाओं को सुनिश्चित करने के लिए तथा प्रसूति सहायता के लिए उपबन्ध करेगा।
अनुच्छेद 43मनरेगा कार्यक्रम इसी अनुच्छेद के अन्तर्गत लागू करने हेतु लगाया गया है।
अनुच्छेद 43 (क)उद्योगों के प्रबंध में कर्मगारों के भाग लेने का अधिकार।
अनुच्छेद 45राज्य की नीति निदेशक तत्त्वों के तहत् 14 वर्ष तक की उम्र के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा देने का प्रावधान है।
अनुच्छेद 50कार्यपालिका से न्यायपालिका का पृथक्करण।
अनुच्छेद 51भारत की विदेशी नीति से सम्बन्धित है।
अनुच्छेद 51 ए (जी)प्राकृतिक पर्यावरण का जिसके अन्तर्गत वन, झील, नदी और वन्य जीव हैं, रक्षा करें और संवर्द्धन करें तथा प्राणी मात्र के प्रति दया भाव रखें।
अनुच्छेद 53संघ की कार्यपालिका सम्बन्धी शक्ति राष्ट्रपति में निहित रहेगी।
अनुच्छेद 54भारत के राष्ट्रपति का निर्वाचन।
अनुच्छेद 57भारतीय संविधान राष्ट्रपति पद के लिए पुनः निर्वाचन के लिए पात्रता निर्धारित करता है।
अनुच्छेद 64उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन अध्यक्ष होगा।
अनुच्छेद 74राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए मन्त्रि-परिषद् होगी, जिसके शीर्ष पर प्रधानमन्त्री रहेगा।
अनुच्छेद 368संविधान का संशोधन करने की संसद की शक्ति और उसके लिए प्रक्रिया।
अनुच्छेद 370इसके अन्तर्गत जम्मू और कश्मीर की विशेष स्थिति का वर्णन है।
अनुच्छेद 371कुछ राज्यों के विशेष क्षेत्रों के विकास के लिए राष्ट्रपति बोर्ड स्थापित कर सकता है; जैसे- गुजरात, महाराष्ट्र, नगालैण्ड, मणिपुर इत्यादि।
अनुच्छेद 394 (क)राष्ट्रपति अपने अधिकार के अन्तर्गत इस संविधान का हिन्दी भाषा में अनुवाद करायेगा।
अनुच्छेद 395भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947, भारत सरकार अधिनियम, 1953 आदि को रद्द किया जा सकता है।

महत्वपूर्ण विभाग : RTI एवं CVC

सूचना का अधिकार (RTI)

  • केन्द्र व राज्य सरकारों के कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए भारतीय संसद द्वारा जून, 2005 में पारित सूचना के अधिकार का अधिनियम 12 अक्टूबर, 2005 से लागू हो गया।
  • सूचना के अधिकार को संविधान की धारा 19 (1) के तहत् यह मूलभूत अधिकार का दर्जा दिया गया है।
  • भारत में सबसे पहले शुरुआत राजस्थान राज्य में सूचना के अधिकार के लिए जनान्दोलन की शुरुआत 1994 में अरुणारॉय की अगुवाई में हुई। 1 मई, 2000 को राजस्थान सरकार से इसे विधिक मान्यता मिली।
  • केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी से यह अपेक्षित है कि वह वैध आवेदन प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर आवेदक को सूचना उपलब्ध करवाये।
  • यदि माँगी गयी सूचना व्यक्ति के जीवन अथवा स्वतन्त्रता से सम्बन्धित है, तो अनुरोध करने वाले को 48 घण्टे के भीतर सूचना उपलब्ध करायी जायेगी।

केन्द्रीय सतर्कता आयोग (CVC)

  • 7 अगस्त, 2003 को केन्द्रीय सतर्कता आयोग (सीबीसी) को वैधानिक दर्जा प्रदान करने के लिए सीबीसी विधेयक पारित हुआ।
  • इस कानून से सरकारी कर्मचारियों, निगमों, सोसाइटियों व स्थानीय कर्मचारियों के विरुद्ध मामलों की जाँच का अधिकार सीबीसी को प्राप्त हो गया है।
  • CBI द्वारा संयुक्त सचिव या इससे ऊँचे स्तर के अधिकारियों के विरुद्ध जाँच के लिए सीबीसी की पूर्वानुमति को इस कानून के तहत् आवश्यक किया गया है।
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🎯 अभी इसी टॉपिक के 5 प्रश्न हल करें (Instant Topic Quiz)

विषय: भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था (Indian Constitution & Polity) — ऊपर पढ़े गए नोट्स की तुरंत जाँच करें!

आपका लाइव स्कोर
0 / 5
अभ्यास प्रश्न #1 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 1: भारतीय संविधान के किस संविधान संशोधन को "लघु संविधान (Mini Constitution)" कहा जाता है जिसके द्वारा प्रस्तावना में समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और अखंडता शब्द जोड़े गए?

अभ्यास प्रश्न #2 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 2: डॉ. भीमराव अंबेडकर ने भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद को "संविधान का हृदय और आत्मा" कहा है?

अभ्यास प्रश्न #3 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 3: संसद के दोनों सदनों की "संयुक्त बैठक (Joint Sitting - अनुच्छेद 108)" कौन बुलाता है और इसकी अध्यक्षता कौन करता है?

अभ्यास प्रश्न #4 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 4: पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा किस संविधान संशोधन द्वारा दिया गया और इसमें कुल कितने विषय हैं?

अभ्यास प्रश्न #5 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 5: भारत के राष्ट्रपति पर महाभियोग (Impeachment) चलाने की प्रक्रिया का उल्लेख किस अनुच्छेद में है?

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