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मध्यकालीन भारत का इतिहास (Medieval Indian History)

CGPSC और व्यापम की परीक्षाओं के लिए अरब आक्रमण से लेकर मराठा साम्राज्य एवं विदेशी यात्रियों तक के सबसे महत्वपूर्ण और प्रमाणित तथ्यों का आकर्षक एवं स्मार्ट नोट्स संकलन।

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भारत पर अरबों के आक्रमण

  • अरबों के भारत आक्रमण के विषय में पर्याप्त सूचना 9वीं शताब्दी के बिलादूरी कृत 'किताब-फुतूल-अल बलदान' में मिलती है।1216 ई. में 'चचनामा' जो फारसी भाषा में लिखी गई है, उसमें भी अरबों के आक्रमण के विषय में पर्याप्त जानकारी मिलती है।
  • 712 ई. में मुहम्मद बिन कासिम ने सिन्ध पर सफल आक्रमण किया। उस समय वहाँ का शासक दाहिर था। अरबों द्वारा भारत पर किया गया यह पहला सफल आक्रमण था।
  • अरबों ने चिकित्सा, दर्शनशास्त्र, नक्षत्र विज्ञान, गणित और शासन प्रबन्ध की शिक्षा भारतीयों से ली।मंसूर के समय (753-774 ई.) में अरब विद्वान भारत से बगदाद अपने साथ दो पुस्तकें ले गये—ब्रह्मपुत्र का ब्रह्म सिद्धान्त तथा खण्डखाद्य।
  • पंचन्त्र का अनुवाद अरबी भाषा में कलिलावादिम्ना नाम से हुआ जिनका उल्लेख अलबरूनी ने किया था।अलबरूनी 11वीं शाताब्दी में भारत आया था।
  • भारत पर अरबवासियों के आक्रमण का मुख्य उद्देश्य धन-दौलत लूटना तथा इस्लाम धर्म का प्रचार-प्रसार करना था।
  • अरबों ने सिन्ध में ऊँट पालन, खजूर की खेती तथा 'दिरहम' नामक सिक्के का प्रचलन करवाया।

महमूद गजनवी

  • गजनी राजवंश का संस्थापक सुबुक्तगीन था।सुबुक्तगीन प्रथम तुर्की शासक था जिसने हिन्दूशाही शासक जयपाल के राज्य पर आक्रमण कर उसे पराजित किया।
  • गजनी के शासक सुबुक्तगीन के पुत्र महमूद गजनवी का जन्म 917 ई. में हुआ।सुबुक्तगीन के बाद महमूद गजनवी ने भारत पर 1000 ई. से 1027 ई. तक कुल 17 बार आक्रमण किया।
  • भारतीय आक्रमण का मुख्य उद्देश्य धन की प्राप्ति था, साम्राज्य विस्तार का कोई इरादा नहीं था।
  • बगदाद के खलीफा अल कादिर बिल्लाह ने उसे 'यमीन-उद्-दौला' तथा 'यमीन-उल-मिल्लाह' की उपाधि दी।
  • महमूद के दरबारी इतिहासकार उतबी ने उसके आक्रमणों को जिहाद माना है, जिसका मूल उद्देश्य इस्लाम का प्रसार और बुतपरस्ती (मूर्ति पूजा) को समाप्त करना था।
  • महमूद ने अपनी सेना की कमान तिलक नामक हिन्दू को सौंपी थी।महमूद ने एक तरफ संस्कृत मुद्रालेख के साथ चाँदी के सिक्के जारी किए।
  • महमूद के साथ भारत आने वाले विद्वानों में अलबरूनी, फिरदौसी और उतबी प्रमुख थे।अलबरूनी की पुस्तक 'किताबुल हिन्द' तत्कालीन इतिहास को जानने का प्रमुख स्रोत है। अलबरूनी ही पुराणों का अध्ययन करने वाला प्रथम मुस्लिम था।

महमूद गजनवी के 17 आक्रमण

क्षेत्र वर्ष शासक
पंजाब का सीमान्त क्षेत्र1000 ई.जयपाल (हिन्दू शाही)
पेशावर, वैहिन्द1001 ई.जयपाल (हिन्दू शाही)
मुल्तान1005 ई.दाऊद करमाथी
भेड़ा1006-07 ई.बाजीराय
मुल्तान1007-08 ई.सुखपाल
वैहिन्द, पेशावर1008-09 ई.आनन्दपाल (हिन्दू शाही) तथा उज्जैन, ग्वालियर, कलिंजर, कन्नौज, दिल्ली, अजमेर की संयुक्त सेना
नारायणपुर1009 ई.स्थानीय शासक
मुल्तान1010-11 ई.सुखपाल
थानेश्वर1011-12 ई.राजाराज
निनदुना1014 ई.त्रिलोचन पाल
कश्मीर1015-16 ई.संग्राम राज (लोहार वंश)
मथुरा व कन्नौज1018-19 ई.राज्यपाल (प्रतिहार)
कलिंजर1019 ई.गण्ड चन्देल और त्रिलोचनपाल
कश्मीर1021 ई.रानी दिद्दा (स्त्री शासक)
ग्वालियर व कलिंजर1022 ई.गण्ड चन्देल
सोमनाथ पर आक्रमण1025-26 ई.भीम प्रथम
सिन्ध के जाट1027 ई.जाट

मुहम्मद गोरी

  • मुईजुद्दीन मुहम्मद बिन साम को ही मुहम्मद गोरी कहा जाता था। वह 1173 ई. में शासक बना।
  • प्रथम आक्रमण 1178 ई. में मुल्तान पर हुआ उस समय मुल्तान पर करमाथी जाति का शासक था।
  • 1178 ई. में गोरी ने गुजरात पर आक्रमण किया किन्तु भीम द्वितीय (मूलराज द्वितीय) ने उसे आबू पर्वत के पास पराजित किया। भारत में यह मुहम्मद गोरी की पहली पराजय थी।
  • तराइन के प्रथम युद्ध 1191 ई. में मुहम्मद गोरी को पृथ्वीराज चौहान ने परास्त किया।
  • तराइन के द्वितीय युद्ध 1192 ई. में मुहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान को परास्त किया।
  • चन्दावर के युद्ध 1194 ई. में मुहम्मद गोरी ने जयचन्द को पराजित किया।
  • वास्तव में भारत में तुर्की राज्य की नींव उसी ने डाली।1206 ई. में गोरी की मृत्यु के बाद कुतुबुद्दीन ऐबक ने भारत में नये वंश की नींव डाली जिसे गुलाम वंश कहा गया।
  • मुहम्मद गोरी ने भारत में प्रथम इक्ता कुतुबुद्दीन ऐबक को (1203-04 ई. में) प्रदान किया था।
  • सिक्कों पर एक ओर कलमा खुदा था तथा दूसरी ओर लक्ष्मी की आकृति अंकित रहती थी।
  • बख्तियार खिलजी ने बिहार विजय के दौरान नालंदा एवं विक्रमशिला विश्व विद्यालय को नष्ट किया।

तुगलक वंश (1320-1414 ई.)

दिल्ली सल्तनत के राजवंशों में से तुगलक वंश ने सर्वाधिक समय तक राज्य किया था।

ग्यासुद्दीन तुगलक (1320-25 ई.)

  • 8 सितम्बर, 1320 ई. को हजार सुतून महल में ग्यासुद्दीन तुगलकशाह के नाम से सिंहासन पर बैठा।
  • 'गाजी' की उपाधि धारण करने वाला दिल्ली सल्तनत का पहला शासक था।
  • दक्षिण के राज्यों में से वारंगल को जीतकर दिल्ली सल्तनत में मिलाया।
  • सिंचाई हेतु नहर निर्माण करने वाला ग्यासुद्दीन पहला शासक था।
  • 1/10 या 1/11 भाग भू-राजस्व वसूल किया।
  • निजामुद्दीन औलिया से मनमुटाव हो गया जिसके लिए सुल्तान ने औलिया को धमकी भरा पत्र भेजा जिसके प्रति उत्तर में कहा था कि "दिल्ली अभी दूर है।"
  • मृत्यु 1325 ई. में जूना खाँ द्वारा निर्मित लकड़ी के महल में दबकर हो गई।
  • दिल्ली सल्तनत में सर्वप्रथम डाक व्यवस्था की शुरुआत ग्यासुद्दीन तुगलक ने की थी।

मुहम्मद बिन तुगलक (1325-51 ई.)

  • जूना खाँ सुल्तान बना और मुहम्मद बिन तुगलक की उपाधि धारण की। इसे 'मनिहारों का राजकुमार' कहा जाता है।
  • 1333 ई. में मोरक्को यात्री इब्नबतूता भारत आया जिसे सुल्तान ने राजदूत बनाकर चीन भेजा। इसने डाक व्यवस्था का विस्तृत वर्णन दिया।
  • राजधानी स्थानान्तरित कर देवगिरि को राजधानी बनाया, जिसका नाम दौलताबाद रखा।
  • दोआब में कर वृद्धि की और एक नये कृषि विभाग 'दीवान-ए-कोही' का निर्माण किया।
  • सर्वप्रथम वस्त्र निर्माणशाला स्थापित की थी।
  • असफल योजनाएँ: दोआब में कर वृद्धि (1326), राजधानी परिवर्तन (1327), सांकेतिक मुद्रा का प्रचलन (1329), खुरासान विजय योजना (1337), कुराचिल अभियान (1338)।
  • सर्वाधिक शिक्षित, विद्वान एवं योग्य शासक था, लेकिन उसे पागल एवं रक्त पिपासु कहा गया है।

मुगल वंश एवं प्रशासन

मुगल शासकों का शासनकाल
शासकशासनकालशासकशासनकाल
जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर1526-30 ई.फर्रुखसियर1713-19 ई.
नासिरुद्दीन हुमायूँ1530-56 ई.मुहम्मद शाह1719-48 ई.
जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर1556-1605 ई.अहमद शाह1748-54 ई.
जहाँगीर1605-27 ई.आलमगीर द्वितीय1754-58 ई.
शाहजहाँ1627-58 ई.शाहआलम द्वितीय1758-1806 ई.
औरंगजेब1658-1707 ई.अकबर द्वितीय1806-37 ई
बहादुरशाह1707-12 ई.बहादुरशाह द्वितीय1837-57 ई.
जहाँदारशाह1712-13 ई.नोट: 1540-1545 ई. शेरशाह सूरी का शासन।

बाबर की विजय एवं महत्वपूर्ण तथ्य

  • बाबर ने 1507 ई. में 'पादशाह' की उपाधि धारण की, इससे पूर्व के शासक सुल्तान की उपाधि धारण करते थे।बाबर के चार पुत्र- हुमायूँ (ज्येष्ठ), कामरान, अस्करी तथा हिन्दाल थे।
  • 1514-19 ई. के मध्य बाबर ने उस्ताद अली और मुस्तफा खाँ नामक दो तुर्क तोपचियों की सेवाएँ प्राप्त कीं।
  • पानीपत का प्रथम युद्ध (21 अप्रैल, 1526 ई.): उजबेकों की युद्ध नीति तुगलमा युद्ध पद्धति तथा उस्मानी विधि अपनाकर इब्राहिम लोदी को पराजित किया। भारत में पहली बार तोपों का प्रयोग किया गया।
  • खानवा के युद्ध (17 मार्च, 1527 ई.): राणा सांगा पराजित हुआ। बाबर ने 'जेहाद' का नारा दिया तथा 'गाजी' की उपाधि धारण की।
  • चन्देरी के युद्ध (29 जनवरी, 1528): मेदिनी राय को पराजित किया।घाघरा के युद्ध (1529 ई.): अफगानों को हराया।
  • बाबर की मृत्यु 26 सितम्बर, 1530 ई. को आगरा में हुई थी। सर्वप्रथम आगरा के रामबाग में दफनाया गया, बाद में काबुल में दफनाया गया।बाबर 'मुबाइयाँ' नामक पद्य शैली का जन्मदाता था।

अकबर और हेमू

  • मध्यकालीन भारतीय इतिहास में हेमू पहला और एकमात्र हिन्दू राजा था, जिसने दिल्ली राज्य सिंहासन पर अधिकार जमाया था तथा 'विक्रमादित्य' की उपाधि धारण की थी।
  • अकबर और हेमू के बीच दिल्ली तथा आगरा पर पुनः अधिकार हेतु पानीपत का द्वितीय युद्ध 1556 ई. में लड़ा गया था, जिसमें हेमू की पराजय हुई।
अकबर के महत्वपूर्ण कार्य
प्रमुख कार्यवर्ष
दास प्रथा का अन्त1562 ई.
हिन्दू तीर्थ यात्रा कर की समाप्ति1563 ई.
जजिया कर की समाप्ति1564 ई.
पर्दा शासन का अन्त1564 ई.
फतेहपुर सीकरी की स्थापना1571 ई.
राजधानी फतेहपुर सीकरी स्थानान्तरित1571 ई.
अकबर की गुजरात विजय1572 ई.
मनसबदारी प्रथा की शुरुआत1567 ई.
फतेहपुर सीकरी में इबादतखाने की स्थापना1575 ई.
मजहर दस्तावेज की घोषणा1579 ई.
दीन-ए-इलाही की स्थापना1582 ई.
इलाही संवत् प्रारम्भ1583 ई.
राजधानी का लाहौर स्थानान्तरण1585 ई.

अकबर के नवरत्न

  • मुल्ला दो प्याजा: कुशाग्र बुद्धि, वाक्पटुता एवं प्याज के प्रति अतिशय रुचि के कारण यह उपाधि।
  • अब्दुर्रहीम खानखाना: बैरम खाँ के पुत्र, 'तुजुके बाबरी' का तुर्की से फारसी में अनुवाद किया।
  • हमीम हुमाम: अति निकट मित्र, पाठशाला के प्रधान अधिकारी।
  • अबुल फजल: कुशल सेनानायक, 'आइन-ए-अकबरी' तथा 'अकबरनामा' के रचयिता।
  • तानसेन: मूल नाम रामतनु पाण्डेय, उपाधि कण्ठाभरण वाणी विलास।
  • राजा मानसिंह: प्रमुख सेनापति, साम्राज्य विस्तार में योगदान।

ग्रन्थों का फारसी में अनुवाद

मूल ग्रन्थ अनुवादक अनुवादक ग्रन्थ आश्रयदाता शासक
सिंहासन बत्तीसीफैजी व अन्यसिरद अफ्जाअकबर
अथर्ववेदहाजी इब्राहिम सरहिन्दी-अकबर
महाभारतबदायूँनी, नकीब खाँ, शेख सुल्तानरज्म नामाअकबर
रामायणअब्दुल कादिर बदायूँनी, इब्न हर करण-अकबर
हरिवंश पुराणमौलाना शैरीजामये रशीदीअकबर
कालिया दमनअबुल फजलअमार दानिशअकबर
राजतरंगिणीमुल्ला मुहम्मद-अकबर
लीलावती (गणित)फैजी-अकबर
भगवत् पुराणराजा टोडरमल-अकबर
नल दमयन्तीफैजीमसनवी नलौदमनअकबर
पंचतन्त्रअबुल फजलअनवारे सहेलीअकबर
बाबन उपनिषद्दारा शिकोहसिर्र-ए-अकबरशाहजहाँ
योग वशिष्ठदारा शिकोह-शाहजहाँ
भगवद्गीतादारा शिकोह-शाहजहाँ

मुगल प्रशासन - विविध तथ्य

  • मुगलकाल में पहला हिन्दी विद्वान मुल्ला वाझी था।
  • जनपद को सरकार के नाम से जाना जाता था।सैन्य विभाग का प्रधान मीरबख्शी था।
  • निकोलाओ मनूची को सेना में चिकित्सक नियुक्त किया गया था।'माल' भूराज्य से सम्बन्धित था।
  • विद्वानों एवं धार्मिक लोगों को दी जाने वाली भूराजस्व मुक्त अनुदान भूमि को मदद-ए-माश (या सयूरगल) कहा जाता था।
  • मुहतसिब जन आचरण के निरीक्षण विभाग का प्रधान था।
  • माहम अनगा ने दिल्ली के पुराने किले में 'खैरूल मनजिल' (मदरसा-ए-बेगम) नामक मदरसे की स्थापना की।
  • मुगलकालीन दरबारी भाषा फारसी थी।अब्दुर्रहीम खानेखाना का मकबरा दिल्ली में है।

मध्यकाल में भारत भ्रमण करने वाले विदेशी यात्री

विदेशी यात्री देश भ्रमणकाल शासनकाल
मार्को पोलोइटली1271-98 ई.पाण्ड्य
इब्नबतूतामोरक्को (अफ्रीका)1333-42 ई.मुहम्मद तुगलक
निकोलो कोण्टीइटली1420-22 ई.देवराय प्रथम
अब्दुर्रज्जाकईरान1442-43 ई.देवराय द्वितीय
एडुअर्डो बारबोसापुर्तगाल1516-18 ई.कृष्णदेव राय
डोमिंगो पायसपुर्तगाल1520-22 ई.कृष्णदेव राय
नूनिजपुर्तगाल1535-37 ई.अच्युतदेव राय
एन्थोनी मांसेरातपुर्तगाल1578-82 ई.अकबर
राल्फ पिचब्रिटेन1585-91 ई.अकबर
सीजर फ्रेडरिकपुर्तगाल16वीं शताब्दीविजयनगर
कैप्टन हॉकिन्सब्रिटेन1608-13 ई.जहाँगीर
विलियम फिंचब्रिटेन1608-13 ई.जहाँगीर
निकोलस डाउटनब्रिटेन1615-17 ई.जहाँगीर
सर टॉमस रोब्रिटेन1615-19 ई.जहाँगीर
एडवर्ड टेरीब्रिटेन1616-19 ई.जहाँगीर
पीटर मुण्डीइटली1630-34 ई.शाहजहाँ
ट्रैवर्नियरफ्रांस1641-87 ई.शाहजहाँ, औरंगजेब
मनूचीइटली1656-87 ई.औरंगजेब
वर्नियरफ्रांस1658-68 ई.औरंगजेब

सिख धर्म गुरु और उनके कार्य

समय (गुरुकाल) सिख गुरु कार्य
1469 से 1538 ई.गुरु नानक देवसिख धर्म की स्थापना
1538 से 1552 ई.गुरु अंगदगुरुमुखी लिपि के जनक
1552 से 1574 ई.गुरु अमरदासगुरु प्रसार हेतु 22 गद्दियों की स्थापना
1574 से 1581 ई.गुरु रामदासअमृतसर की स्थापना (1577), गुरु का पद पैतृक
1581 से 1606 ई.गुरु अर्जुन देव'स्वर्ण मन्दिर' की नींव रखी, 'गुरु ग्रन्थ साहब' का संकलन, सिखों से उनकी आय का 10 प्रतिशत दान के रूप में लेने की प्रथा प्रारम्भ की।
1606 से 1645 ई.गुरु हरगोविन्द सिंह'अकाल तख्त' की स्थापना, सिखों को लड़ाकू जाति में बदला।
1645 से 1661 ई.गुरु हररायउत्तराधिकार (मुगलों के) युद्ध में भाग
1661 से 1664 ई.गुरु हरकिशनअल्पवयस्क अवस्था में ही मृत्यु
1664 से 1675 ई.गुरु तेग बहादुरइस्लाम कुबूल न करने के कारण औरंगजेब द्वारा सिर कलम कर दिया गया।
1675 से 1708 ई.गुरु गोविन्द सिंह'खालसा' सेना की स्थापना, नाम के अन्त में 'सिंह', आनन्दपुर में अपना मुख्यालय बनाया, अन्तिम गुरु थे। इनका जन्म पटना में हुआ था।

शिवाजी एवं मराठा साम्राज्य

17वीं शताब्दी में मुगल साम्राज्य के विघटन की प्रक्रिया प्रारम्भ होने के साथ ही देश में स्वतन्त्र राज्यों की स्थापना का जो सिलसिला आरम्भ हुआ उनमें राजनीतिक दृष्टि से सर्वाधिक शक्तिशाली राज्य मराठों का था।ग्राण्ट डफ के अनुसार सत्रहवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में मराठों का उदय 'आकस्मिक अग्निकाण्ड' की भाँति हुआ।

शिवाजी (1627-80 ई) का परिचय

  • जन्म: 19 फरवरी, 1630 ई.
  • माता-पिता: जीजाबाई एवं शाहजी भौंसले(व्यक्तित्व पर महत्वपूर्ण प्रभाव माता जीजाबाई का पड़ा।)
  • पत्नी: तुकाबाई मोहिते, साइबाई निम्बालकर
  • धार्मिक गुरु: स्वामी रामदास (धरकरी सम्प्रदाय)| गुरु व संरक्षक: दादा कोणदेव
  • राज्याभिषेक: 14 जून, 1674| राजधानी: रायगढ़
  • उपाधि: छत्रपति, राजा (औरंगजेब द्वारा दी गयी), हिन्दुत्व धर्मोद्धारक('हिन्दू पद पादशाही' अंगीकार की)
  • निधन: 3 अप्रैल, 1680

प्रमुख विजय एवं संघर्ष

  • सर्वप्रथम 1643 ई. में बीजापुर के सिंहगढ़ के किले पर अधिकार किया। तत्पश्चात् 1646 ई. में तोरण पर।
  • 1656 ई. में महत्वपूर्ण विजय जावली की थी (मराठा सरदार चन्द्रराव मोरे से)।
  • बीजापुर शासक ने अफजल खाँ को भेजा। ब्राह्मण दूत कृष्णाजी भास्कर से मंशा का पता चला। शिवाजी ने 2 नवम्बर, 1659 ई. को अफजल खाँ की हत्या कर दी।
  • 1660 ई. में औरंगजेब ने शाइस्ता खाँ को भेजा। शिवाजी ने रात्रि में चुपके से आक्रमण कर दिया, वह भाग गया।
  • शिवाजी ने 1664 ई. में एवं 1679 ई. में सूरत को लूटा।
  • 1665 ई. में जयसिंह से पुरन्दर की सन्धि हुई।1666 ई. में आगरा के मुगल दरबार (जयपुर भवन) में कैद से भागे।

निम्न जाति आन्दोलन

Historically Modern Era
  • ज्योतिबा फूले: 'गुलामगिरी' (1872) तथा 'सत्यशोधक समाज' द्वारा निम्न जातियों को ब्राह्मणों और धार्मिक ग्रन्थों से सुरक्षा दिलाने पर बल।
  • डॉ. बी. आर. अम्बेडकर: 1924 ई. में 'अखिल भारतीय दलित वर्ग' की स्थापना। 1927 ई. में 'बहिष्कृत भारत' नामक पत्रिका का प्रकाशन।
  • महात्मा गांधी: अछूतों को 'हरिजन' (भगवान के जन) का नाम दिया। 1932 ई. में 'अखिल भारतीय अस्पृश्यता निवारण संघ' की स्थापना (बाद में 'हरिजन सेवक संघ')।
  • बी. आर. शिन्दे: 1906 ई. में 'डिप्रेस्ड क्लासेज मिशन सोसाइटी'।
  • ई.वी. रामास्वामी नायकर: 1925 ई. में 'आत्मसम्मान आन्दोलन' (दक्षिण भारत में ब्राह्मणों द्वारा जातीय भेदभाव के विरोध में)।
  • जस्टिस पार्टी (1916): सी. एन. मुदालियर, टी. एम. नायर, पी. टी. चेन्नी।
  • गुरु वायूर सत्याग्रह: मन्दिर प्रवेश हेतु। नेतृत्व- के. केलप्पण। पी. कृष्णपिल्लै व ए. के. गोपाल ने भाग लिया।
  • नदार आन्दोलन (1925): तमिलनाडु में सामाजिक भेदभाव का विरोध।
निम्न जाति आन्दोलन
संस्थास्थानसंस्थापकवर्ष
डिप्रेस्ड क्लास मिशन सोसायटीबम्बईवी.आर. शिन्दे1906
बहुजन समान आंदोलनमहाराष्ट्रशंकर राव जाधव-
अखिल भारतीय अस्पृश्यता निवारण संघबम्बईमहात्मा गाँधी1932
सत्य शेधक समाजबम्बईज्योतिबा फूले1873
'दि आल इण्डिया डिप्रेस्ड क्लास फेडरेशन'बम्बईडॉ. भीमराव अम्बेडकर1920
बहिष्कृत हितकारिणी सभाबम्बईडॉ. भीमराव अम्बेडकर1924
समाज समता संघबम्बईडॉ. भीमराव अम्बेडकर1927
ऑल इण्डिया डिप्रेस्ड क्लास एसोसिएसनबम्बईमहात्मा गाँधी1932
अनुसूचित जाति परिसंघ-डॉ. भीमराव अम्बेडकर1942
दक्षिण भारत में निम्न जाति आन्दोलन
संस्थास्थानसंस्थापकवर्ष
अरुविप्पुरम आंदोलनकेरलनारायण गुरु1888
जस्टिस आन्दोलनद. भारतसी.एन. मुदलियर, टी.एम. नायर, पी. त्यागराज1916
आत्म-सम्मान आन्दोलनमद्रासई.वी. रामास्वामी नायकर (पेरियार)1920
नायर सर्विस सोसायटीमद्रासमन्नार पद्मानाभ पिल्लई1914
प्रजा मित्र मण्डलीमद्राससी.आर. रेड्डी-
वायकोम सत्याग्रहत्राणकोर (केरल)के.पी. केशव 'मेनन' तथा ई.वी. रामास्वामी नायकर1924
गुरुवायूर सत्याग्रहकेरलके. केलप्पन1931-36

भारत में यूरोपीय आगमन

Historically Modern Era
भारत में यूरोपीय व्यापारिक कम्पनियों के आगमन का क्रम
क्र. सं.देशवर्षकम्पनी
1.पुर्तगाली1498एस्तादो द इण्डिया
2.डच1602वेरिंगीदे ओस्ट इंडिशे कम्पनी
3.अंग्रेज1600द गवर्नर एण्ड कम्पनी ऑफ मर्चेण्ट्स ऑफ ट्रेडिंग इन टू द ईस्ट इण्डीज
4.फ्रांसीसी1664कम्पनी द इंद ओरिएण्टल
5.डेन1616डेन ईस्ट इण्डिया कम्पनी

पुर्तगाली (Portuguese)

  • व्यापारिक उद्देश्य से भारत में आने वाले प्रथम यूरोपीय पुर्तगाली थे।
  • भारत आने वाला प्रथम यूरोपीय तथा प्रथम पुर्तगाली वास्कोडिगामा था।
  • अब्दुल मुनीक नामक गुजराती पथ प्रदर्शक की सहायता से वास्कोडिगामा 1498 ई. में कालीकट तट पर पहुँचा था, वहाँ के शासक जमोरिन ने उसका स्वागत किया।
  • भारत आने वाला दूसरा पुर्तगाली अल्बारेज कैब्राल (1500 ई.) था।
  • दूसरी बार वास्कोडिगामा 1502 ई. में भारत आया तथा कोचीन में 1503 ई. में पुर्तगाली फैक्ट्री तथा 1505 ई. में दूसरी फैक्ट्री कन्नूर में स्थापना की।
  • फ्रांसिस्को डी अल्मेडा 1505 ई. में भारत में प्रथम पुर्तगाली वायसराय बनकर आया। इसने भारत में 'नीले पानी की नीति' (Blue Water Policy) का अनुसरण किया (हिन्द महासागर में प्रभुत्व स्थापित करना)।
  • अल्फ्रांसो डी अल्बुकर्क (1509 ई.) को भारत में पुर्तगालियों की शक्ति का वास्तविक संस्थापक माना जाता है। 1510 ई. में इसने गोवा के समृद्ध बन्दरगाह पर अधिकार कर लिया (बीजापुर यूसुफ आदिल शाही सुल्तान से)।अल्बुकर्क ने पुर्तगालियों की संख्या भारत में बढ़ाने के लिए भारतीय महिलाओं से विवाह करने को प्रोत्साहित किया।
  • निनो डी कुन्हा (1529-38), ने 1534 ई. में बेसीन और 1535 ई. में दीव पर अधिकार किया। कुन्हा ने 1530 ई. में शासन का मुख्य केन्द्र 'कोचीन' के स्थान पर 'गोवा' को बना दिया।
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विषय: भारत का इतिहास — प्राचीन, मध्यकालीन एवं आधुनिक (Indian History) — ऊपर पढ़े गए नोट्स की तुरंत जाँच करें!

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अभ्यास प्रश्न #1 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 1: सिंधु घाटी सभ्यता का प्रसिद्ध बंदरगाह नगर (गोदीबाड़ा / Dockyard) "लोथल" किस नदी के किनारे स्थित था?

अभ्यास प्रश्न #2 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 2: गौतम बुद्ध के जीवन से संबंधित "चतुर्थ बौद्ध संगीति" किसके शासनकाल में और कहाँ आयोजित हुई थी?

अभ्यास प्रश्न #3 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 3: दिल्ली सल्तनत में "बाजार नियंत्रण प्रणाली (मूल्य नियंत्रण)" एवं घोड़ों को दागने व सैनिकों का हुलिया लिखने की प्रथा किसने प्रारंभ की?

अभ्यास प्रश्न #4 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 4: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के किस अधिवेशन में पहली बार "पूर्ण स्वराज (Purna Swaraj)" का प्रस्ताव पारित किया गया?

अभ्यास प्रश्न #5 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 5: स्थायी बंदोबस्त (Permanent Settlement - 1793), रैयतवाड़ी और महालवाड़ी व्यवस्था के जनक क्रमशः कौन थे?

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