Premium Notes Library
36
CGपरीक्षामित्र
SMART STUDY HUB
Download PDF
Highest Weightage Subject

आधुनिक भारत का इतिहास (Modern Indian History)

CGPSC और व्यापम की परीक्षाओं के लिए यूरोपीय आगमन, 1857 की क्रांति, गवर्नर जनरल और राष्ट्रीय आन्दोलन के सबसे महत्वपूर्ण और प्रमाणित तथ्यों का आकर्षक एवं स्मार्ट नोट्स संकलन।

Full PDF Available

Click below to download the complete file

Download Now

भारत में यूरोपीय आगमन

भारत में यूरोपीय व्यापारिक कम्पनियों के आगमन का क्रम
क्र. सं.देशवर्षकम्पनी
1.पुर्तगाली1498एस्तादो द इण्डिया
2.डच1602वेरिंगीदे ओस्ट इंडिशे कम्पनी
3.अंग्रेज1600द गवर्नर एण्ड कम्पनी ऑफ मर्चेण्ट्स ऑफ ट्रेडिंग इन टू द ईस्ट इण्डीज
4.फ्रांसीसी1664कम्पनी द इंद ओरिएण्टल
5.डेन1616डेन ईस्ट इण्डिया कम्पनी

पुर्तगाली (Portuguese)

  • व्यापारिक उद्देश्य से भारत में आने वाले प्रथम यूरोपीय पुर्तगाली थे।
  • भारत आने वाला प्रथम यूरोपीय तथा प्रथम पुर्तगाली वास्कोडिगामा था।
  • अब्दुल मुनीक नामक गुजराती पथ प्रदर्शक की सहायता से वास्कोडिगामा 1498 ई. में कालीकट तट पर पहुँचा था, वहाँ के शासक जमोरिन ने उसका स्वागत किया।
  • भारत आने वाला दूसरा पुर्तगाली अल्बारेज कैब्राल (1500 ई.) था।
  • दूसरी बार वास्कोडिगामा 1502 ई. में भारत आया तथा कोचीन में 1503 ई. में पुर्तगाली फैक्ट्री तथा 1505 ई. में दूसरी फैक्ट्री कन्नू में स्थापना की।
  • फ्रांसिस्को डी अल्मेडा 1505 ई. में भारत में प्रथम पुर्तगाली वायसराय बनकर आया। इसने भारत में 'नीले पानी की नीति' (Blue Water Policy) का अनुसरण किया (हिन्द महासागर में प्रभुत्व स्थापित करना)।
  • अल्फ्रांसो डी अल्बुकर्क (1509 ई.) को भारत में पुर्तगालियों की शक्ति का वास्तविक संस्थापक माना जाता है। 1510 ई. में इसने गोवा के समृद्ध बन्दरगाह पर अधिकार कर लिया (उस समय बीजापुर यूसुफ आदिल शाही सुल्तान के अधीन था)। अल्बुकर्क ने पुर्तगालियों की संख्या भारत में बढ़ाने के लिए भारतीय महिलाओं से विवाह करने को प्रोत्साहित किया।
  • निनो डी कुन्हा (1529-38), ने हुमायूँ और गुजरात के बहादुरशाह के बीच संघर्ष का लाभ उठाकर 1534 ई. में बेसीन और 1535 ई. में दीव पर अधिकार किया। कुन्हा ने 1530 ई. में शासन का मुख्य केन्द्र 'कोचीन' के स्थान पर 'गोवा' को बना दिया।

गवर्नर जनरल एवं वायसराय

लॉर्ड डलहौजी के महत्वपूर्ण कार्य

  • भारत में पहली रेल लाइन का निर्माण 'ग्रेट इण्डियन पेनन्सुला' कम्पनी द्वारा किया था। इस पर पहली रेलगाड़ी ब्लैक ब्यूटी चलायी गयी।
  • दूसरी रेल लाइन 1854 ई. में ईस्ट इण्डिया रेलवे द्वारा कलकत्ता से रानीगंज तक (120 मील) तथा तीसरी रेल लाइन 'ग्रेट इण्डिया पेनन्सुला' कम्पनी द्वारा 1854 ई. में बम्बई से कल्याण तक (32 मील) बिछाई गयी।
  • 1854 ई. में नया पोस्ट ऑफिस एक्ट पारित हुआ और भारत में पहली बार डाक टिकट (2 पैसे का डाक टिकट) का प्रचलन प्रारम्भ हुआ।
  • पहली बार सार्वजनिक निर्माण विभाग (1854 ई.) की स्थापना की गयी।
  • 1852 ई. में पहली बार तार विभाग की स्थापना की। प्रथम टेलीग्राफ लाइन पेशावर से कलकत्ता, दूसरी कलकत्ता से रंगून तथा तीसरी कलकत्ता से आगरा के बीच शुरू की।
  • 1852 ई. में इनाम कमीशन की स्थापना की गयी। इसका उद्देश्य भूमिकर रहित जागीरों का पता करके उन्हें छीनना था।
  • द्वितीय आंग्ल-बर्मा युद्ध 1852 ई. में लोअर बर्मा एवं पीगू को अंग्रेजी राज्य में मिला लिया गया।
  • भारत के बन्दरगाहों को अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए खोल दिया।
  • जी.टी. रोड का पुनः निर्माण किया गया तथा गंगा नहर का निर्माण हुआ।

1858 के भारत सरकार अधिनियम द्वारा भारत के गवर्नर जनरल को अब वायसराय कहा जाने लगा। जो भारत में इंग्लैण्ड की सम्राज्ञी के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता था। अतः भारत का अन्तिम गवर्नर जनरल लॉर्ड कैनिंग था एवं भारत का प्रथम वायसराय भी लॉर्ड कैनिंग ही नियुक्त हुआ।

लॉर्ड कैनिंग (1856-62 ई.)

  • सामान्य सेना भर्ती अधिनियम, 1856: नये सैनिक भर्ती किये जायेंगे, उन्हें सैन्य सेवा हेतु कहीं भी भेजा जा सकता है।
  • सबसे महत्वपूर्ण घटना थी सन 1857 ई. का विद्रोह। इसके बाद प्रशासनिक सुधार के अन्तर्गत भारत का शासन कम्पनी के हाथों से सीधे ब्रिटिश सरकार के नियन्त्रण में ले लिया गया।
  • 1856 ई. में विधवा पुनर्विवाह अधिनियम पारित हुआ।
  • व्यपगत सिद्धान्त (Doctrine of Lapse) यानी कि विलय की नीति को समाप्त कर दिया गया।
  • 1856 ई. में पैतृक सम्पत्ति सम्बन्धी कानून: धर्म परिवर्तन से व्यक्ति को पैतृक सम्पत्ति से वंचित नहीं किया जायेगा।
  • आर्थिक सुधारों के लिए इंग्लैण्ड के अर्थशास्त्री 'विल्सन' को भारत बुलाया, जिसने 500 रुपये से अधिक आय पर आयकर (Income Tax) लगा दिया तथा आयात कर को 10 प्रतिशत कम करके निर्यात कर 4 प्रतिशत बढ़ा दिया।
  • इण्डियन पेनल कोड IPC (भारतीय दण्ड संहिता) का 1861 ई. से प्रारम्भ।
  • इण्डियन हाईकोर्ट एक्ट (1861 ई.): बम्बई, कलकत्ता तथा मद्रास में एक-एक उच्च न्यायालय की स्थापना की गयी।
  • 1861 ई. का भारतीय परिषद् अधिनियम: गवर्नर जनरल के कौंसिल के सदस्यों की संख्या 4 से बढ़ाकर 5 कर दी गयी तथा लेजिस्लेटिव कौंसिल के सदस्यों की संख्या 4 से बढ़ाकर 12 कर दी गयी।

लॉर्ड लिटन

  • बम्बई, मद्रास, हैदराबाद, पंजाब, मध्य भारत आदि में भयानक अकाल पड़ा। रिचर्ड स्टेची की अध्यक्षता में एक 'अकाल आयोग' की स्थापना की।
  • दिल्ली दरबार समारोह (1 जनवरी, 1877): महारानी विक्टोरिया को 'कैसर-ए-हिन्द' की उपाधि दी गयी। (नोट: द्वितीय दिल्ली दरबार 1903 में कर्जन द्वारा, तृतीय 1911 में हार्डिंग द्वितीय द्वारा आयोजित हुआ)।
  • मार्च, 1878 ई. में 'सोम प्रकाश' को प्रतिबन्धित करने के लिए "भारतीय समाचार-पत्र अधिनियम" (वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट) पारित कर भारतीय समाचार-पत्रों पर कठोर प्रतिबन्ध लगा दिये।
  • 1878 ई. में "भारतीय शस्त्र अधिनियम" (Indian Arms Act) पारित हुआ।
  • सिविल सेवा परीक्षाओं में प्रवेश की अधिकतम आयु 21 वर्ष से घटाकर 19 वर्ष कर दी।
  • द्वितीय आंग्ल-अफगान युद्ध (1878-80 ई.) 'गण्डमक की सन्धि' के द्वारा समाप्त हुआ।
  • 1879 ई. में वैधानिक जनपद सेवा (Statutory Civil Services) में नियुक्ति का अधिकार दिया। अलीगढ़ में एक 'मुस्लिम ऐंग्लो प्राच्य महाविद्यालय' की स्थापना की।

लॉर्ड रिपन (1880-84 ई.)

  • सर्वाधिक महत्वपूर्ण कार्य: स्थानीय स्वशासन (Local Self Government)।
  • सिविल सेवा में प्रवेश की आयु को 19 वर्ष से बढ़ाकर 21 वर्ष कर दिया।
  • सन् 1881 ई. में सर्वप्रथम नियमित जनगणना करवायी गयी।
  • भारतीय मजदूरों की स्थिति में सुधार हेतु प्रथम कारखाना अधिनियम, 1881 पारित किया (12 वर्ष से कम आयु के बच्चों के काम करने के घण्टे निर्धारित)।
  • शैक्षिक सुधारों के अन्तर्गत 1882 ई. में हण्टर कमीशन का गठन किया गया (अध्यक्ष: सर विलियम हण्टर)।
  • सर्वप्रथम समाचार-पत्रों की स्वतन्त्रता को बहाल करते हुए 1882 ई. में वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट को समाप्त किया।

लॉर्ड वेवेल (1943-47 ई.)

  • क्लीमेण्ट एटली के नेतृत्व में लेबर पार्टी सत्ता में आयी।
  • 25 जून, 1945 ई. में "शिमला सम्मेलन" में काँग्रेस और मुस्लिम लीग को बुलाया, परन्तु बातचीत असफल रही।
  • 1945 ई. में आजाद हिन्द फौज के सिपाहियों पर दिल्ली के लाल किले में मुकदमा चला (बचाव पक्ष के प्रमुख वकील भूलाभाई देसाई थे)।
  • बम्बई शाही नौसेना में 18 फरवरी, 1946 को नौ सैनिकों का विद्रोह हुआ (सरदार बल्लभ भाई पटेल ने शान्त कराया)।
  • कैबिनेट मिशन मार्च, 1946 ई. में भारत आया (सदस्य: स्टेफोर्ड क्रिप्स, पैथिक लारेंस, ए. बी. अलेक्जेण्डर)। काँग्रेस ने स्वीकार किया, मुस्लिम लीग ने अस्वीकार कर "16 अगस्त, 1946 की सीधी कार्यवाही दिवस" का आयोजन किया।
  • 20 फरवरी, 1947 को एटली ने घोषणा की कि जून, 1948 तक सत्ता सौंप देंगे।

लॉर्ड माउण्टबेटन (1947-48 ई.)

  • भारत का अन्तिम गवर्नर जनरल तथा स्वतन्त्र भारत का प्रथम गवर्नर जनरल बना।
  • स्वतन्त्र भारत के प्रथम एवं अन्तिम भारतीय गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी हुए (21 जून, 1948 से 26 जनवरी, 1950)।
  • 24 जनवरी, 1950 को प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद निर्वाचित हुए।
  • 4 जुलाई, 1947 को एटली द्वारा भारतीय स्वतन्त्रता विधेयक प्रस्तुत, 18 जुलाई को स्वीकृति।
  • 15 अगस्त, 1947 ई. को भारत तथा पाकिस्तान अलग हुए। 15 अगस्त को प्रथम प्रधानमन्त्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्र को सम्बोधित किया।
  • कश्मीर के महाराजा हरिसिंह ने 26 अक्टूबर, 1947 को विलय का समर्थन किया।
  • 30 जनवरी, 1948 को महात्मा गांधी की हत्या नाथूराम गोडसे ने कर दी।

1857 का विद्रोह (Revolt of 1857)

  • 1857 के विद्रोह का प्रतीक चिह्न कमल व रोटी था।
  • विद्रोह के समय भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड कैनिंग तथा ब्रिटेन का प्रधानमन्त्री विस्कॉण्ट पामर्स्टन था। कैनिंग ने अपना आपातकालीन मुख्यालय इलाहाबाद बनाया।
  • फैजाबाद में विद्रोह को मौलवी अहमदुल्ला ने अपना नेतृत्व प्रदान किया। इन्हें पकड़ने के लिए 50,000 रुपये का इनाम घोषित था।
  • सर्वाधिक सिपाहियों की संख्या अवध से थी।
  • असम में नेतृत्व दीवान मनीराम दत्त ने किया था। नाना साहब और बेगम हजरतमहल भागकर नेपाल चले गये थे।
  • राव तुलाराम ने काबुल में आजाद हिन्द फौज की स्थापना की थी।
  • बंगाल, पंजाब, राजपूताना, सिन्धिया (ग्वालियर), हैदराबाद, मद्रास आदि क्षेत्रों के शासकों ने विद्रोह को कुचलने में अंग्रेजी सरकार की मदद की थी।
1857 का विद्रोह : विभिन्न विद्वानों की नजर में
विद्रोह का स्वरूपविद्वानों के मत
सैनिक विद्रोहजॉन लारेंस और सीलें
ईसाई धर्म के विरुद्ध एक धर्म युद्धएल. ई. आर. रीज
सभ्यता और बर्बरता का संघर्षटी. आर. होम्स
राष्ट्रीय स्वरूपअशोक मेहता
राष्ट्रीय विद्रोहडिजरायली
भारत का प्रथम स्वतन्त्रता संग्रामवीर सावरकर
सामान्य जनता का विद्रोहशशि भूषण चौधरी
ईश्वर द्वारा भेजी गयी विपत्तिईसाई मिशनरी तथा इवेंजिकल
काली और श्वेत जाति का संघर्षके. जे. जी. भीडले

1857 पर महत्वपूर्ण पुस्तकें

  • 'फर्स्ट वार ऑफ इण्डियन इण्डिपेण्डेन्स' - वी. डी. सावरकर
  • 'द ग्रेट रेबेलियन' - अशोक मेहता
  • 'द सिपोय म्यूटनी एण्ड द रिवोल्ट ऑफ 1857' - आर. सी. मजूमदार
  • 'अट्ठारह सौ सत्तावन' - सुरेन्द्र नाथ सेन (सरकारी इतिहासकार)
  • 'सिविल रिबेलियन इन द इण्डियन म्यूटनीज' - शशि भूषण चौधरी
  • 'भारत का प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम, 1857-59' - कार्ल मार्क्स और एंजेल्स
  • 'ब्रिटिश पैरामाउण्टसी एण्ड इण्डियन रेनेसा' - आर. सी. मजूमदार
  • 'रिबेलियन (1857)' - पी.सी. जोशी
  • 'हिस्ट्री ऑफ इंडियन म्यूटिनी' - टी. आर. होक्स
  • 'द सिपॉय म्यूटिनी ऑफ 1857' - ए.पी. चट्टोपाध्याय
  • 'असबाब-ए-बगावत-ए-हिन्द...' - सर सैयद अहमद खाँ (भारतीय भाषा में कारणों पर लिखने वाले प्रथम भारतीय)

1857 के विद्रोह के प्रमुख नायक एवं ब्रिटिश दमनकर्ता

क्र. केन्द्र भारतीय नायक विद्रोह का समय ब्रिटिश नायक दमन का समय
6.जगदीशपुर (बिहार)कुँवर सिंहअगस्त, 1857कर्नल नील1858
7.बरेलीखान बहादुर खाँ1857विलियम टेलर1858
8.फैजाबादमौलवी अहमद उल्ला1857जनरल रेनार्ड1858
9.फतेहपुरअजीजमुल्ला1857जनरल रेनर्ड1858
1857 के विद्रोह के अन्य नेता
क्र.सं.विद्रोह का केन्द्रविद्रोही नेता
1.मेरठकदम सिंह
2.हरियाणाराव तुलाराम
3.सुल्तानपुरशहीद हसन
4.रामगढ़ (म.प्र.)रानी अवंतीबाई
5.गोरखुपरगजाधर सिंह
6.मथुरादेवी सिंह
7.सतारारंगो बापूजी गुरते
8.हैदराबादसोनाजी पंत
9.कर्नाटकभीमराव मुंडर्गी
10.मद्रासगुलाम गौस, शेख इब्राहिम
11.कोयम्बटूरगुलबाग स्वामी
12.असममनिराम दत्त, कदर्पेश्वर सिंह, पियाली सची कोनजी

भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन व काँग्रेस

भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस (1885 ई.)

  • 26 जुलाई, 1876 को सुरेन्द्र नाथ बनर्जी ने आनन्द मोहन बोस के सहयोग से इण्डियन एसोसिएशन या भारत संघ की स्थापना कलकत्ता में की। काँग्रेस से पूर्व यह अखिल भारतीय स्तर की संस्था थी।
  • भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस की स्थापना 1885 ई. में अवकाश प्राप्त अंग्रेज अधिकारी एलन अक्टोवियन ह्यूम द्वारा की गयी। वही इसके महासचिव थे। इसे ही 'हरमिट ऑफ शिमला' कहा जाता है।
  • काँग्रेस के लखनऊ अधिवेशन (1916) में बाल गंगाधर तिलक ने कहा था- "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और इसे मैं लेकर रहूँगा।"
  • भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस का प्रथम सरकारी इतिहास पट्टाभि सीतारमैया ने लिखा।

व्यक्तिगत सत्याग्रह (1940 ई.)

  • काँग्रेस के द्वारा अगस्त प्रस्ताव को पूरी तरह से ठुकरा दिया तथा गांधीजी के नेतृत्व में व्यक्तिगत सत्याग्रह शुरू करने का निर्णय लिया गया। यह ब्रिटिश सरकार की भारत नीति के प्रति नैतिक विरोध की प्रतीकात्मक अभिव्यक्ति थी।
  • 17 अक्टूबर, 1940 को 'व्यक्तिगत सत्याग्रह' की शुरुआत हुई और गांधीजी ने प्रथम सत्याग्रही के रूप में विनोबा भावे को मनोनीत किया तथा दूसरे सत्याग्रही पं. जवाहर लाल नेहरू थे।
  • एलन कैम्बल जौनसन ने गाँधी-इर्विन समझौते में गाँधी जी के लाभ को 'सांत्वना पुरस्कार' कहा।
  • इस सत्याग्रह में कुल करीब 25,000 सत्याग्रही जेल गये।

क्रान्तिकारी संगठन व पुस्तकें

प्रमुख भारतीय क्रान्तिकारी संगठन
संगठनसंस्थापकस्थानवर्ष
इण्डियन एसोसिएशनसुरेन्द्र नाथ बनर्जी एवं आनन्द मोहन बोसपूना1896-97
व्यायाम मण्डलचापेकर बन्धुपूना1896-97
मित्र मेलासावरकर बन्धुपूना1899
ढाका अनुशीलन समितिपी. मित्रा और पुलिन दासमिदनापुर1904
अभिनव भारतवी. डी. सावरकरपूना1904
स्वदेश बान्धव समितिअश्विनी कुमार दत्तबारिसाल1905
भारत माता सोसाइटीअजीत सिंह व अम्बा प्रसादपंजाब1907
हिन्दुस्तान रिपब्लिक ऐसोसिएशनशचीन्द्र सान्यालकानपुर1924
नौजवान सभाभगत सिंहलाहौर1926
हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन ऐसोसिएशनचन्द्रशेखर आजाददिल्ली1928
इण्डियन रिपब्लिक आर्मीसूर्यसेनचटगाँव1930
विदेशों में प्रमुख भारतीय क्रान्तिकारी संगठन
संगठनसंस्थापकवर्षस्थान
ब्रिटिश इण्डिया सोसायटीविलियम एडम1839 ई.लन्दन
ईस्ट इण्डिया ऐसोसिएशनदादा भाई नौरोजी1866 ई.लन्दन
नेशनल इण्डिया ऐसोसिएशनमेरी कारपेण्टर और मैनिंग1870-71लन्दन
इण्डिया हाउसश्यामजी कृष्ण वर्मा1904 ई.लन्दन
अभिनव भारतवी. डी. सावरकर1906 ई.लन्दन
इण्डियन इण्डिपेण्डेन्स लीगतारकनाथ1907 ई.अमरीका
यूनाइटेड इंडिया हाउसतारकनाथ दास जी. डी. कुमार1908 ई.सिस्टल (यू.एस.ए.)
प्रमुख क्रान्तिकारी पुस्तकें, पत्र व पत्रिकाएँ
पुस्तकें / पत्र-पत्रिकाएँलेखक / सम्पादक
बम मैनुआलपी. एन. वापट
बन्दी जीवनशचीन्द्र नाथ सान्याल
भवानी मन्दिरअरविन्द घोष
युगान्तरवारीन्द्र कुमार घोष, भूपेन्द्रनाथ दत्त
सन्ध्यामुखदाचरण
भारतमाताअजीत सिंह
मदरलाला हरदयाल
भारतीय स्वतन्त्रता संग्रामवी. डी. सावरकर
वन्देमातरम् (पत्रिका)भीकाजी रूस्तम कामा
वन्देमातरम् (पत्र)अरविन्द घोष
पाथेर दावीशरतचन्द चट्टोपाध्याय
इण्डियन सोशियोलॉजिस्टश्यामजी कृष्ण वर्मा
वर्तमान रणनीतिबारीन्द्र कुमार घोष
सर्क्युलर-ए-आजादीरामनाथपुरी
स्वतन्त्रता आन्दोलन सम्बन्धी पुस्तकें
पुस्तकें / पत्र-पत्रिकाएँलेखक
असबाबे बगावते हिन्दसर सैय्यद अहमद खाँ
सत्यार्थ प्रकाशदयानन्द सरस्वती
पॉवर्टी एण्ड अनब्रिटिश रूल इन इण्डियादादा भाई नौरोजी
आनन्दमठ, बंग दर्शन, चन्द्रशेखरबंकिमचन्द्र चटर्जी
वामबोधिनीकेशवचन्द्र सेन
सोशल रिफॉर्म्स एण्ड राइज ऑफ द मराठा पॉवर, एसे इन इण्डियन इकोनोमिक्सएम. जी. रानाडे
गीतांजलि, गोरा, द हंग्री स्टोन्सरवीन्द्रनाथ टैगोर
हाउ इण्डिया वॉट फॉर फ्रीडमऐनी बेसेन्ट

राष्ट्रीय स्वतन्त्रता आन्दोलन सम्बन्धी प्रमुख वचन व नारे

प्रसिद्ध वचन/नारेसम्बन्धित व्यक्ति
"हे राम"महात्मा गांधी
"करो या मरो"महात्मा गांधी
"हमने घुटने टेक कर रोटी माँगी, किन्तु उत्तर में पत्थर मिले"महात्मा गांधी (सविनय अवज्ञा पूर्व)
"यह एक ऐसा चैक है, जिसका बैंक पहले ही नष्ट हो जाने वाला था"महात्मा गांधी
"भारत छोड़ो"महात्मा गांधी
"स्वराज हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है"बाल गंगाधर तिलक
"सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है"रामप्रसाद बिस्मिल
"वन्दे मातरम्"बंकिमचन्द्र चटर्जी
"सारे जहाँ से अच्च्छा हिन्दोस्तां हमारा"इकबाल
"जन-गण-मन अधिनायक जय हो"रवीन्द्रनाथ टैगोर
"इन्कलाब जिन्दाबाद"भगतसिंह
"साम्राज्यवाद का नाश हो"भगतसिंह
प्रसिद्ध वचन/नारेसम्बन्धित व्यक्ति
"दिल्ली चलो"सुभाषचन्द्र बोस
"जय हिन्द"सुभाषचन्द्र बोस
"तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूँगा"सुभाषचन्द्र बोस
"मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश साम्राज्य के कफन में कील सिद्ध होगी"लाला लाजपत राय
"साइमन कमीशन वापस जाओ"लाला लाजपत राय
"पूर्ण स्वराज"पं. जवाहर लाल नेहरू
"आराम हराम है"पं. जवाहर लाल नेहरू
"हू लिव्स इफ इण्डिया डाइज"पं. जवाहर लाल नेहरू
"विजयी विश्व तिरंगा प्यारा"श्यामलाल गुप्ता
"वेदों की ओर लौटो"दयानन्द सरस्वती
"समूचा भारत एक बन्दीगृह है"सी. आर. दास
"हिन्दी, हिन्दू, हिन्दोस्तान"भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
"जय जवान, जय किसान"लाल बहादुर शास्त्री
"मारो फिरंगी को"मंगल पाण्डे
"जय जगत"विनोबा भावे
"कर मत दो"सरदार बल्लभभाई पटेल
"सम्पूर्ण क्रान्ति”जयप्रकाश नारायण
"मुसलमान मूर्ख थे... और हिन्दू उनसे भी बड़े मूर्ख थे..."अबुल कलाम आजाद
"दरो-दीवार ये हसरत की नजर करते हैं..."वाजिद अलीशाह
⚡ Active Recall • तुरंत स्व-मूल्यांकन

🎯 अभी इसी टॉपिक के 5 प्रश्न हल करें (Instant Topic Quiz)

विषय: भारत का इतिहास — प्राचीन, मध्यकालीन एवं आधुनिक (Indian History) — ऊपर पढ़े गए नोट्स की तुरंत जाँच करें!

आपका लाइव स्कोर
0 / 5
अभ्यास प्रश्न #1 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 1: सिंधु घाटी सभ्यता का प्रसिद्ध बंदरगाह नगर (गोदीबाड़ा / Dockyard) "लोथल" किस नदी के किनारे स्थित था?

अभ्यास प्रश्न #2 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 2: गौतम बुद्ध के जीवन से संबंधित "चतुर्थ बौद्ध संगीति" किसके शासनकाल में और कहाँ आयोजित हुई थी?

अभ्यास प्रश्न #3 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 3: दिल्ली सल्तनत में "बाजार नियंत्रण प्रणाली (मूल्य नियंत्रण)" एवं घोड़ों को दागने व सैनिकों का हुलिया लिखने की प्रथा किसने प्रारंभ की?

अभ्यास प्रश्न #4 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 4: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के किस अधिवेशन में पहली बार "पूर्ण स्वराज (Purna Swaraj)" का प्रस्ताव पारित किया गया?

अभ्यास प्रश्न #5 CGPSC / CG Vyapam Standard (+2.0, -0.66)

प्र. 5: स्थायी बंदोबस्त (Permanent Settlement - 1793), रैयतवाड़ी और महालवाड़ी व्यवस्था के जनक क्रमशः कौन थे?

👆 किसी भी विकल्प पर क्लिक करके अपना उत्तर जांचें।